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जहां लगती थी नक्सलियों की जनअदालत,वहां लगी ग्रामसभा:अबूझमाड़ में पेड़ की छांव में जुटे ग्रामीण, विकास कार्यों और गांव की जरूरतों पर हुई ppkZ




छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ में गांधी जयंती के अवसर पर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपने गांव की जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और जरूरी कार्यों को लेकर चर्चा की। गांव के आगामी विकास की प्राथमिकताएं तय करने के लिए ग्रामीणों से सुझाव भी लिए गए। इसी दौरान ओरछा विकासखंड की ग्राम पंचायत कच्चापाल से सामने आई तस्वीर ने ध्यान खींचा। कभी नक्सल प्रभाव के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके में ग्रामीण पेड़ की छांव के नीचे एकत्र हुए और ग्राम सभा में अपने गांव के भविष्य को लेकर चर्चा की। जहां कभी जन अदालतों का था डर, वहां ग्राम सभा में ग्रामीणों की भागीदारी कच्चापाल की ग्राम सभा इसलिए खास रही, क्योंकि यह इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा है। यहां पहले नक्सलियों की जन अदालतें लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अब इसी क्षेत्र में ग्रामीण संवैधानिक ग्राम सभा में बैठकर गांव की जरूरतों और विकास कार्यों पर अपनी बात रख रहे हैं। पेड़ की छांव में ग्रामीणों का एक साथ बैठकर चर्चा करना गांव में लोकतांत्रिक भागीदारी की तस्वीर पेश करता नजर आया। ग्राम सभा में ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर जरूरी कार्यों और सुविधाओं को लेकर अपने सुझाव दिए। जल संरक्षण और रोजगार समेत कई मुद्दों पर चर्चा जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी विशेष ग्राम सभाओं के जरिए ग्रामीणों से गांव की विकास प्राथमिकताओं पर सुझाव लिए गए। विकसित भारत-जी राम जी योजनांतर्गत विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी जुटाई गई। ग्राम सभाओं में जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर चर्चा हुई। रिफॉर्म उत्सव के तहत ग्रामीणों को 125 दिवस रोजगार की वैधानिक गारंटी, समय पर रोजगार और मजदूरी भुगतान के साथ योजना के तहत अनुमेय 375 प्रकार के कार्यों की जानकारी भी दी गई। ग्राम सभा से मिले सुझावों के आधार पर गांवों की स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए आगामी विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। कच्चापाल की ग्राम सभा इस बदलाव की तस्वीर बनी, जहां कभी नक्सली प्रभाव के बीच भय का माहौल था, वहीं अब ग्रामीण अपने गांव के फैसलों में सीधे भागीदारी करते नजर आए।



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