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जालंधर में डॉक्टरों को मिला प्रशिक्षण:सरकारी अस्पतालों में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का ₹40,000 वाला जीवनरक्षक इंजेक्शन अब मुफ्त मिलेगा




पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जालंधर में दिल के दौरे (हार्ट अटैक) और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत और बेहतर इलाज देने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में डॉक्टरों को आपातकालीन प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई। इस दौरान बताया गया कि सरकारी अस्पतालों में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के इलाज के लिए उपयोग किया जाने वाला लगभग ₹40,000 की कीमत का जीवनरक्षक ‘टेनेक्टेप्लेस’ (Tenecteplase) इंजेक्शन पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। समय पर अस्पताल पहुंचने और इस इंजेक्शन के लगने से मरीजों की जान बचाई जा सकती है। पंजाब सरकार के मुख्य फ्लैगशिप कार्यक्रमों में ‘पंजाब STEMI (मिशन अमृत)’ और ‘पंजाब स्ट्रोक प्रोग्राम’ को जिले में सुचारू रूप से लागू करने के उद्देश्य से सिविल अस्पताल जालंधर में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। यह शिविर सिविल सर्जन जालंधर डॉ. राजेश गर्ग की कुशल देखरेख में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने बताया कि पंजाब सरकार आम जनता की सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी के तहत दिल के दौरे और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा दिया गया डॉ. गर्ग ने आगे बताया कि इन कार्यक्रमों के अंतर्गत बाजार में लगभग ₹40,000 की कीमत वाला बेहद महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक ‘टेनेक्टेप्लेस’ इंजेक्शन पात्र मरीजों को सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त दिया जा रहा है। यदि मरीज को समय रहते अस्पताल लाया जाए और चिकित्सीय प्रोटोकॉल के अनुसार यह इंजेक्शन लगा दिया जाए, तो मरीज की कीमती जान बचाई जा सकती है। प्रशिक्षण समारोह के दौरान कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. अभिनव शूर द्वारा जिला अस्पताल जालंधर, सब-डिविजनल अस्पताल फिल्लोर और सब-डिविजनल अस्पताल नकोदर के सभी इमरजेंसी मेडिकल अफसरों और रेजीडेंट डॉक्टरों को विशेष ट्रेनिंग दी गई।
डॉ. अभिनव शूर ने डाक्टरों को दिया प्रशिक्षण डॉ. अभिनव शूर ने उपस्थित डॉक्टरों को आपातकालीन स्थिति के दौरान मरीजों की तुरंत पहचान करने, सही समय पर इलाज शुरू करने और क्लिनिकल प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना है, ताकि हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मरीजों को बिना किसी देरी के तुरंत और बेहतर इलाज मिल सके।



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