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चित्तौड़गढ़ जिला कारागृह के अंदर बंदियों द्वारा पार्टी करने, डांस करने और नशा करते हुए वीडियो बनाने का मामला अब और गंभीर हो गया है। इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, जेल प्रशासन की जांच के बाद जेल महानिदेशक (डीजी) ने चार जेल कर्मचारियों को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रतिबंधित मोबाइल फोन जेल के अंदर किसके माध्यम से पहुंचे, बंदियों ने वीडियो कैसे बनाए और वे जेल से बाहर किसके जरिए पहुंचे। इसके साथ ही उस समय ड्यूटी पर तैनात जेल कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तलाशी में मिले दो मोबाइल, फिर खुलने लगी पूरी परत एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि 24 जुलाई 2026 को जिला कारागृह के तत्कालीन कारापाल उज्जवल सिंह राठौड़ ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि जेल में बंद कुछ विचाराधीन बंदियों और पहले जेल से छूट चुके कुछ लोगों द्वारा जेल के अंदर वीडियो बनाए गए थे, जो बाद में बाहर सामने आए। इसके बाद 23 जुलाई को जेल प्रशासन और कर्मचारियों ने पूरे कारागृह परिसर की तलाशी ली। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे बंदियों से पूछताछ की गई तो ए वार्ड में बंद विचाराधीन बंदी मोहित की निशानदेही पर एसटीडी कक्ष के पास बने स्टोर रूम से पन्नी में छिपाकर रखे गए दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। इनमें एक वीवो कंपनी का एंड्रॉयड मोबाइल और दूसरा कीपैड मोबाइल था। इसके बाद राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 42 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। मोबाइल अंदर कौन लाया और वीडियो बाहर किसने पहुंचाए, यही सबसे बड़ा सवाल जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की और अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें हरियाणा के रोहतक निवासी मोहित पुत्र दलबीर सिंह, चित्तौड़गढ़ जिले के दौला जी खेड़ा निवासी भैरूलाल गुर्जर, त्रेष्ठा निवासी सत्यनारायण गुर्जर, मायराघाटा निवासी प्रहलाद राय गुर्जर, त्रेष्ठा निवासी शोभालाल उर्फ नन्दा, भीलवाड़ा जिले के कान्या खेड़ी निवासी विनोद गुर्जर, राशमी के सिहाना निवासी हर्षवर्धन सिंह राजपूत, बस्सी के जयसिंगपुरा निवासी नारायण लाल सुथार, निकुम्भ थाना क्षेत्र के सांगरिया निवासी दशरथ गुर्जर तथा कपासन थाना क्षेत्र के हथियाना निवासी मनोहर लाल जाट शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच का सबसे अहम हिस्सा यह है कि दोनों मोबाइल फोन जेल के अंदर किसके माध्यम से पहुंचे और बंदियों द्वारा बनाए गए वीडियो जेल से बाहर किसने पहुंचाए। इन दोनों बिंदुओं पर लगातार जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जाएगी। जांच जेल कर्मचारियों तक पहुंची, चार को किया निलंबित इस मामले में जेल प्रशासन ने भी अपनी अलग जांच कराई। जांच में वीडियो बनने के समय ड्यूटी पर मौजूद कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद जेल महानिदेशक अशोक राठौड़ ने तत्कालीन जेलर ओंकार लाल, हवालदार महेंद्र सिंह, जेल प्रहरी रईस मोहम्मद और सुनीता को निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि ओंकार लाल का पहले ही अलवर और महेंद्र सिंह का उदयपुर तबादला हो चुका था, लेकिन जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। जेल महानिदेशक अशोक राठौड़ ने बताया कि मामला सामने आया था। अभी चारों को निलंबित किया गया है। उसके बाद इनके खिलाफ़ चार्जशीट जारी होंगी। अगर मिलीभगत सामने आएगी वो उनके खिलाफ़ कार्रवाई होगी। हालांकि इस संबंध में जब जेल अधीक्षक नरेंद्र स्वामी से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी नहीं है। दूसरी ओर, निलंबन की कार्रवाई के बाद जेल विभाग में पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। पहले भी मिल चुके हैं मोबाइल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल चित्तौड़गढ़ जिला कारागृह में मोबाइल मिलने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जेल के अंदर से मोबाइल बरामद हो चुके हैं और बंदियों के वीडियो सामने आने की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद प्रतिबंधित मोबाइल फोन जेल तक पहुंचना और उनका लंबे समय तक इस्तेमाल होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब पुलिस और जेल प्रशासन दोनों अपने-अपने स्तर पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।
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जिला जेल में बंदियों में बनाए वीडियो, 4 कर्मचारी सस्पेंड:अब तक 10 गिरफ्तार; स्मार्ट फोन अंदर किसने पहुंचाए, जांच में जुटी पुलिस
