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झालावाड़ का कैंसर सेंटर 13 साल से अटका:2.39 करोड़ भी नहीं मिले, PPP की तैयारी का आरोप




झालावाड़ के टर्शरी केयर कैंसर सेंटर (TCCC) के भवन निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 2.39 करोड़ रुपए की राशि देने से इनकार कर दिया है। इसे लेकर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुराज सिंह हाड़ा ने आरोप लगाया कि 13 साल से लंबित इस परियोजना को पूरा कराने के बजाय सरकार इसे पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर देने की तैयारी में है। उनका कहना है कि 2013 में मंजूर परियोजना का भवन अब तक नहीं बन पाया, जबकि जयपुर और बीकानेर में कैंसर सेंटर तैयार हो चुके हैं। केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में भी झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का TCCC के रूप में अनुमोदन दर्ज है। 2013 में 45 करोड़, 13 साल बाद भी भवन अधूरा हाड़ा ने बताया कि वर्ष 2013 की नीति के तहत झालावाड़ के TCCC के लिए 45 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। इसके बावजूद 13 साल में भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि जयपुर और बीकानेर के सेंटर तैयार हो गए, जबकि झालावाड़ की परियोजना अब भी अटकी हुई है। राजस्थान सरकार के पुराने दस्तावेज में भी बीकानेर के TCCC का निर्माण पूर्णता की ओर और झालावाड़ के सेंटर का काम प्रगति पर बताया गया था। कोटा को 149 करोड़, झालावाड़ को नहीं मिली नई राशि हाड़ा के मुताबिक हाल ही में कोटा को कैंसर सुविधाओं के लिए 149 करोड़ रुपए मिले, लेकिन झालावाड़ को भवन निर्माण के लिए मांगी गई 2.39 करोड़ रुपए की राशि तक नहीं मिली। उन्होंने इसे झालावाड़ की कैंसर उपचार सुविधाओं के प्रति उदासीनता बताया। 18 करोड़ की मशीनें, लेकिन भवन नहीं बना हाड़ा ने कहा कि वर्ष 2013 में सेंटर के लिए मशीनों के लिए 18 करोड़ रुपए दिए गए थे। इतने वर्षों में मशीनों की कीमत और तकनीक दोनों बदल चुके हैं। उनका आरोप है कि भवन का निर्माण नहीं होने पर सरकार ने नाराजगी जताई और अब इन मशीनों को पीपीपी मोड में देने की बात कही जा रही है। दो कैंसर डॉक्टरों की पोस्टिंग पर भी सवाल हाड़ा ने आरोप लगाया कि झालावाड़ में कैंसर डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने के बावजूद दो डॉक्टरों को गंगानगर में पोस्टिंग दी गई। उनका कहना है कि इससे यह सवाल उठता है कि सरकार झालावाड़ के बजाय गंगानगर में टर्शरी कैंसर सेंटर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बीकानेर में मरीजों के लिए सामाजिक संस्था की मदद हाड़ा ने कहा कि झालावाड़ के कैंसर मरीजों के लिए अब तक कोई सामाजिक संस्था आगे नहीं आई। इसके विपरीत बीकानेर में श्रीकृष्ण सेवा समिति मरीजों के ठहरने, भोजन और नाश्ते की व्यवस्था करती है। गरीब मरीजों को किराया भी दिया जाता है। जयपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट, बीकानेर में भी तैयारी उन्होंने बताया कि जयपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा पिछले वर्ष शुरू हो चुकी है, जबकि बीकानेर में अगले वर्ष इसे शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए बीकानेर के स्टाफ को टाटा मेमोरियल अस्पताल में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। हाड़ा के अनुसार मरीजों की कोशिकाओं से CAR-T सेल थेरेपी शुरू करने की भी तैयारी है। यह चौथे स्टेज के एडवांस्ड ब्लड कैंसर, ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे मामलों में उपयोगी हो सकती है। डे-केयर में दवाओं के बजट में कटौती का आरोप हाड़ा ने कहा कि झालावाड़ के डे-केयर कैंसर सेंटर में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन दवाओं के बजट में कटौती की जा रही है। उनका कहना है कि मरीजों को दोपहर 3 बजे ही डिस्चार्ज कर दिया जाता है। ऐसे में बढ़ते मरीजों के हिसाब से सुविधाओं और बजट को बढ़ाने की जरूरत है। सांसद-विधायक कोष से जुटाएं धन हाड़ा ने मांग की कि झालावाड़ कैंसर अस्पताल के लिए सांसद और विधायक कोष से भी धन जुटाया जाए, ताकि लंबे समय से अटकी परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि पिछले 13 वर्षों से इस महत्वपूर्ण परियोजना की उपेक्षा हो रही है। दो सरकारों के बीच अटका प्रोजेक्ट हाड़ा के अनुसार फिलहाल झालावाड़ कैंसर केयर सेंटर का काम केंद्र और राज्य सरकार के बीच अटका हुआ है। केंद्र की TCCC योजना में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को शामिल किया गया था; केंद्र सरकार के अनुसार इस योजना में TCCC को कैंसर उपचार के लिए तृतीयक स्तर की सुविधा के रूप में विकसित किया जाना है।



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