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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली विधानसभा क्षेत्र के ‘बीत एरिया’ में स्थित 77 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक टाहलीवाल जलापूर्ति योजना को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। इस ऐतिहासिक पेयजल परियोजना को अब ‘वाटर सप्लाई हेरिटेज म्यूजियम’ (जलापूर्ति धरोहर संग्रहालय) के रूप में विकसित किया जाएगा ।इस जलापूर्ति योजना का इतिहास बेहद गौरवशाली और तकनीकी दूरदर्शिता की अनूठी मिसाल है। इसके तहत 1949 में स्थापित इस योजना के ऐतिहासिक पंप हाउस, वहां मौजूद विंटेज पंपिंग मशीनरी, तकनीकी अभिलेखों (Technical Records) और जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी धरोहर का पुनर्संरक्षण कर उन्हें सहेज कर रखा जाएगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने स्वयं इस ऐतिहासिक योजना का औचक निरीक्षण किया और मौके पर उपस्थित जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। इतिहास को समझिए स्थापना व उद्घाटन: इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन 6 दिसंबर, 1949 को तत्कालीन पूर्वी पंजाब के राज्यपाल सर चंदूलाल एम. त्रिवेदी ने किया था। नामकरण व निर्माण: उस समय इस योजना का नाम ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ रखा गया था। इसका निर्माण तत्कालीन लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा करवाया गया था। इंग्लैंड से नाता: इस ऐतिहासिक पंप हाउस में स्थापित करने के लिए विशेष रूप से इंग्लैंड (England) से मशीनरी मंगवाई गई थी। कभी 31 गांवों की जीवनरेखा थी यह योजना देश की आजादी के तुरंत बाद सीमित संसाधनों के बीच तैयार की गई यह परियोजना बीत क्षेत्र के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। उस दौर में इस योजना के माध्यम से क्षेत्र के 31 गांवों की लगभग 20 हजार आबादी को पेयजल उपलब्ध कराया गया था। इसमें 156 हॉर्स पावर के दो रस्टन डीजल इंजन स्थापित किए गए थे, जिनके माध्यम से वर्ष 1974 तक लगातार पेयजल की आपूर्ति होती रही। इसके बाद तकनीक बदली और बिजली से संचालित आधुनिक पंपिंग व्यवस्था शुरू हुई, लेकिन ऐतिहासिक पंप हाउस और उस दौर की मशीनें आज भी सुरक्षित खड़ी हैं। आज भी सुरक्षित हैं विंटेज उपकरण और फ्लाई-व्हील उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने निरीक्षण के दौरान बताया कि इस ऐतिहासिक पंप हाउस में आज भी उस समय की विशाल विंटेज पंपिंग मशीनें, फ्लाई-व्हील संचालित उपकरण और मूल संरचना (Original Structure) पूरी तरह से सुरक्षित है, जो तत्कालीन इंजीनियरिंग कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इन सभी ऐतिहासिक धरोहरों को यथावत संरक्षित किया जाएगा। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध पुरानी एवं ऐतिहासिक जलापूर्ति मशीनरी को भी यहां लाकर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि प्रदेश में पेयजल व्यवस्था के विकास की ऐतिहासिक यात्रा को एक ही छत के नीचे संजोया जा सके। शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए बनेगा ज्ञान का केंद्र उपमुख्यमंत्री ने इस परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश की आजादी के समय की विपरीत परिस्थितियों का अंदाजा इस योजना को देखकर लगाया जा सकता है। आज हिमाचल प्रदेश में आधुनिक पेयजल योजनाएं कार्य कर रही हैं, लेकिन यह ऐतिहासिक योजना दशकों तक बीत क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा बनी रही। हेरिटेज म्यूजियम के रूप में विकसित होने के बाद यह परिसर विद्यार्थियों, अभियंताओं (Engineers), शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।” इस संग्रहालय के बनने से आने वाली पीढ़ियां हिमाचल की सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियंत्रिकी (Public Health Engineering) के गौरवशाली इतिहास और उस दौर के अभियंताओं व अधिकारियों के अद्वितीय योगदान को बहुत करीब से देख और समझ सकेंगी।
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टाहलीवाल जलापूर्ति योजना बनेगी हेरिटेज म्यूजियम:1949 में स्थापित पंप हाउस और विंटेज मशीनरी का होगा पुनर्संरक्षण, इंग्लैंड से आई थीं मशीनें
