Headlines

टोंक के ग्रेड-थर्ड टीचर्स ने जयपुर में किया प्रदर्शन:बोले- 8 साल से ट्रांसफर नहीं हुआ, सरकार जल्द प्रक्रिया शुरू करे।




तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले सहित विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर राज्यस्तरीय प्रदर्शन किया गया। तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति, राजस्थान के बैनर तले हुए प्रदर्शन में टोंक जिले के शिक्षक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। शिक्षकों ने कहा कि उन्हें वरिष्ठता नहीं, बल्कि तबादले की जरूरत है और सरकार जल्द ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू करे। टोंक के शिक्षक भी बड़ी संख्या में पहुंचे जयपुर के शहीद स्मारक पर हुए प्रदर्शन में राज्यभर के तृतीय श्रेणी शिक्षक शामिल हुए। टोंक जिले से भी बड़ी संख्या में शिक्षक और महिला शिक्षिकाएं प्रदर्शन में पहुंचीं। शिक्षकों ने “वरिष्ठता नहीं, ट्रांसफर चाहिए” के नारे लगाए। शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के उस बयान का विरोध किया, जिसमें कहा गया था कि जिला बदलने पर वरिष्ठता खत्म होने के कारण शिक्षक आंदोलन करते हैं। शिक्षकों ने कहा कि वे शपथ पत्र देने को तैयार हैं कि वरिष्ठता को लेकर कोई आंदोलन नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें ट्रांसफर का अधिकार मिलना चाहिए। आठ साल से तबादले नहीं होने का आरोप धरने में वक्ताओं ने कहा कि पिछले आठ वर्षों से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। अन्य सभी कैडर के तबादले खोले जाते हैं, लेकिन केवल तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर प्रतिबंध रहता है। शिक्षकों ने कहा कि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने तख्तियां भी लहराईं। डेपुटेशन में पक्षपात का आरोप धरने में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि डेपुटेशन के जरिए “पिक एंड चूज” का खेल चल रहा है। उनका कहना था कि सरकारें अपने चहेते शिक्षकों को डेपुटेशन के माध्यम से घर के पास नियुक्ति का लाभ देती रही हैं, जबकि सामान्य शिक्षक वर्षों से तबादले का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा अपने संकल्प पत्र में किए गए तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले के वादे को पूरा नहीं कर रही है। रेसटा के पदाधिकारी भी रहे मौजूद धरने में शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) राजस्थान के प्रदेश महामंत्री नवल सिंह मीणा के नेतृत्व में संगठन से जुड़े सैकड़ों पदाधिकारियों और शिक्षकों ने भाग लिया। उन्होंने राज्य सरकार से जल्द तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले शुरू करने की मांग की। शिक्षकों ने बताई अपनी समस्याएं शिक्षकों ने कहा कि 20 से 25 वर्षों से बाहरी जिलों में कार्यरत रहने के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई और विवाह जैसे पारिवारिक मामलों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों में संतुलन नहीं बना पाने से कई शिक्षक मानसिक तनाव में रहते हैं। लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से मानसिक थकावट भी बढ़ रही है। शिक्षकों ने यह भी कहा कि छह सत्रों से वरिष्ठ अध्यापक पदों पर पदोन्नति नहीं हुई है। एकल, विधवा, परित्यक्ता और गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों को भी राहत नहीं मिल रही है। 10 डार्क जोन जिलों का मुद्दा उठाया शिक्षकों ने बताया कि बीकानेर, बाड़मेर, डूंगरपुर, जालौर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, झालावाड़, सिरोही, बारां और जैसलमेर जैसे डार्क जोन जिलों में गैर अनुसूचित क्षेत्र के मूल निवासी तृतीय श्रेणी शिक्षक पिछले करीब 20 वर्षों से अपने गृह जिले में तबादले या रिक्त पदों पर समायोजन का इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश में 2.35 लाख से ज्यादा तृतीय श्रेणी शिक्षक प्रदर्शन के दौरान साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार- प्रारंभिक शिक्षा माध्यमिक शिक्षा टोंक जिले में 651 पद रिक्त शाला दर्पण पोर्टल के 2 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार टोंक जिले में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 5,781 पद स्वीकृत हैं। इनमें 5,130 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 651 पद रिक्त हैं। प्रदेशाध्यक्ष ने सरकार से की मांग शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि संगठन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, शिक्षा निदेशक सहित कई विधायकों और मंत्रियों को ज्ञापन दे चुका है, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन मिले हैं। उन्होंने कहा कि हजारों किलोमीटर दूर कार्यरत तृतीय श्रेणी शिक्षक लंबे समय से घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं। सरकार को शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द तबादला प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *