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नर्मदापुरम में किसानों का 11 घंटे प्रदर्शन:भोपाल कूच पर अड़े किसान; राष्ट्रगान से थमा टकराव, एसपी ने रोते किसान को लगाया गले




मध्यप्रदेश के सैकड़ों किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सोमवार को माँ नर्मदा का पूजन करके भोपाल के लिए कूच किया। सुबह 9:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक नर्मदापुरम शहर से बाहर निकलने के लिए किसानों का संघर्ष जारी रहा। करीब 11 घंटे नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, कलेक्टर और एसपी समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी व पुलिसकर्मी ग्राउंड पर मौजूद रहे। प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग करने और भारी पुलिस बल तैनात करने के बावजूद किसान पीछे नहीं हटे और मुख्यमंत्री आवास के घेराव के इरादे से आगे बढ़ते रहे। जिले में 11 घंटे चले इस संघर्ष के दौरान सरकार के प्रति आक्रोश के साथ-साथ संवेदनशीलता, सकारात्मकता और एकजुटता के दृश्य भी देखने को मिले। एसकेएम के इस प्रदर्शन में पुलिस बिना लाठी-डंडे के खड़ी नज़र आई। जब बैरिकेड्स हटाने से रोकने के लिए पुलिस करीब आई, तो किसान राष्ट्रगान गाने लगे, जिससे सभी के कदम थम गए। ग्राम टिगरिया के युवा किसानों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर साथी किसानों के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली में आरओ (RO) का पानी रखा और उनकी प्यास बुझाई। वहीं, रोते हुए एक किसान को एसपी साईं कृष्णा एस थोटा ने उठाकर गले से लगा लिया, जो कि एक संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बनी। देखे…आंदोलन की 5 रील्स हनुमान चालीसा और सत्यनारायण कथा का आयोजन प्राचीन सेठानी घाट पर नर्मदा पूजन से पहले 4-5 घंटे किसान और प्रशासन के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने नजरबंद पदाधिकारियों को छुड़ाने के लिए प्रशासन को चेतावनी दी और दो मिनट का मौन धारण किया। इसके बाद उन्होंने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया तथा सरकार की सद्बुद्धि के लिए सत्यनारायण भगवान की कथा भी कराई। एकजुटता की मिसाल पेश की, साथियों की प्यास बुझाई टिगरिया ग्राम के सूरज गौर और उनके दोस्तों ने पैदल यात्रा में शामिल किसान साथियों के साथ एकजुटता की मिसाल पेश की। उन्होंने किसान साथियों की प्यास बुझाने के लिए अपने पैसों से आरओ (RO) पानी की व्यवस्था की। सूरज ने बताया कि गाँव के दोस्तों ने एक दिन पहले ही रुपये इकट्ठा कर पानी साथ ले जाने का निर्णय लिया था। सुबह से पानी की 190 कैन ट्रॉली में रखकर ले आए और पैदल यात्रा में पीछे ट्रॉली लगा दी, जिससे वे लगातार किसानों को पानी पिलाते रहे। लाठीचार्ज से लिया सबक: भोपाल में बिना लाठी दिखी पुलिस दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज का असर सोमवार को नर्मदापुरम में देखने को मिला। आमतौर पर प्रदर्शन और आंदोलन के दौरान पुलिस सुरक्षा के लिहाज से हौजपाइप या लाठी लेकर तैनात रहती है, लेकिन सोमवार को किसानों के प्रदर्शन के दौरान किसी भी पुलिसकर्मी के हाथ में लाठी या हौजपाइप नहीं था। दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज से नर्मदापुरम जिला प्रशासन ने सबक लिया। राष्ट्रगान से रुका टकराव: बैरिकेडिंग हटाने से रोकने के लिए जब पुलिस आगे बढ़ी, तो किसानों ने तुरंत राष्ट्रगान शुरू कर दिया। पुलिस की इस संयमित कार्रवाई की चारों तरफ चर्चा रही। अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के बाद शासन स्तर से ही प्रदर्शनों के दौरान संयम बरतने के निर्देश दिए गए थे। किसानों की रैली से पहले एम्बुलेंस को बैरिकेडिंग खोलकर निकाला नर्मदापुरम जिले की सीमा पर स्थित नर्मदा ब्रिज से पहले किसानों को रोकने के लिए ‘थ्री-लेयर’ बैरिकेडिंग की गई थी, जहाँ भारी पुलिस बल तैनात था। किसानों की रैली पहुँचने से कुछ ही मिनट पहले बुधनी की ओर से एक एम्बुलेंस आई, जिसमें एक गंभीर/आपातकालीन (इमरजेंसी) मरीज़ सवार था। स्थिति को देखते हुए कलेक्टर सोमेश मिश्रा और एसपी साईं कृष्णा एस थोटा ने तत्काल टीम को बैरिकेडिंग खोलकर एम्बुलेंस को रास्ता देने का निर्देश दिया। मात्र 15 सेकंड के भीतर टीम ने बैरिकेड्स हटाकर एम्बुलेंस को सुरक्षित बाहर निकाल दिया। किसानों के बीच रहे कलेक्टर, एसपी ने लगाया गले प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर सोमेश मिश्रा मौके पर किसानों के बीच मौजूद रहे। उन्होंने लगातार संवाद कर उन्हें मनाने का प्रयास किया। इसी दौरान एक किसान फूट-फूटकर रोने लगा और एसपी के पैर पकड़कर बोला, “साहब, हमारी बात सुनो। भोपाल जाने दो, हमारी मूंग बिकवा दो।” किसान की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी। एसपी साईं कृष्णा एस थोटा ने किसान को उठाया, उसे अपने गले से लगाकर शांत कराया और हाथ भी जोड़े। एसपी के इस व्यवहार ने एक संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश की। सोशल मीडिया पर अब एसपी की तारीफ के साथ यह वीडियो/रील तेज़ी से शेयर हो रही है।



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