![]()
इन दिनों राष्ट्राध्यक्षों को एक मंच पर देखकर, उनके बयानों को सुनकर सामान्य व्यक्ति को लगता है कि क्या हम और हमारा देश सुरक्षित है? कुछ ऊंचे कद के लोगों के तो बयान भी किसी हथियार के वार से कम नहीं होते। आमजन के मन में बेचैनी आना स्वाभाविक है। दैनिक वस्तुएं महंगी हो गई हैं। बेरोजगारी का डर बना हुआ है। ऊपर से तकनीक एक ऐसी जीवनशैली में हमें पटक रही है, जहां कुछ समय बाद हर व्यक्ति को लगेगा कि हम बहुत अकेले हैं। ऐसे में एक विचार अपने भीतर जरूर उतारें। हनुमान जी ने रावण से भरी सभा में कहा था कि तुम बहुत ताकतवर हो, लेकिन याद रखना दुनिया के सारे ताकतवर अपनी-अपनी गलतियों के कारण हारते हैं। दुनिया में युद्ध तो चलते ही रहेंगे। ऐसे में सामान्यजन अपने भीतर चैन, अमन, शांति उतारने के लिए एक प्रयोग करें। चौबीस घंटे में दो या तीन बार विचार-शून्य हो जाएं और बिना विचार के गहरी सांस अपनी नाभि तक लाएं और नाभि से ही छोड़ें। बिना सोचे भी सांस लें, शांति उतरेगी।
Source link
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:शांति पानी हो तो 24 घंटे में दो- तीन बार विचार-शून्य हो जाएं
