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पाकुड़ जिला मुख्यालय में रविवार को करमा पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। शहर के बड़ी अलीगंज में भुइयां रेजीमेंट सामाजिक संस्था की ओर से करमा पर्व का आयोजन किया गया। पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम स्थल पर आकर्षक तोरण द्वार बनाया गया था। बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे नए कपड़े पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे। महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से करम की डाली लेकर पूजा स्थल पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का आयोजन हुआ। महिलाएं और बच्चे पारंपरिक नृत्य करते नजर आए, जबकि कई लोग गाजे-बाजे के साथ झूमते हुए भी दिखे। भाई-बहन के प्रेम का भी प्रतीक पर्व करमा पर्व प्रकृति और पेड़-पौधों की पूजा से जुड़ा पर्व है। इस दिन करम पेड़ की डाली को स्थापित कर उसकी पूजा की जाती है। इसे जीवन, हरियाली और धरती की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। किसान अच्छी पैदावार और खेतों में हरियाली की कामना करते हुए करम देवता से प्रार्थना करते हैं। करमा पर्व भाई-बहन के प्रेम का भी प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों की सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पर्व में कर्म देवता की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि व्यक्ति अच्छे कर्म करता है तो प्रकृति और भाग्य उसका साथ देते हैं। तीन दिनों तक चलता है पर्व भुइयां रेजीमेंट के संस्थापक और अधिवक्ता मोहन कुमार राय ने बताया कि करमा पर्व भाई-बहन के प्रेम के साथ प्रकृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। बड़ी अलीगंज में संस्था की ओर से यह पर्व कई वर्षों से मनाया जा रहा है और इस वर्ष भी पारंपरिक तरीके से आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि करमा पर्व मुख्य रूप से तीन दिनों तक चलता है। एकादशी के दिन इसकी विशेष पूजा की जाती है। हालांकि पाकुड़ और साहिबगंज जिले में इसे इस दिन मनाने की परंपरा है। आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने में दिनेश राय, पिंटू राय, संतोष राय, राजू राय, किशन राय, निमाई राय, रविंद्र राय, मोनू राय, कारण राय, जमीर राय, मोती राय समेत संस्था के कई सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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पाकुड़ में उत्साह के साथ मना करमा पर्व:महिलाओं ने करम डाली की पूजा कर मांगी खुशहाली, तीन दिनों तक चलता है पर्व
