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पाकुड़ में भगवान बलभद्र का 36वां पूजन कार्यक्रम संपन्न:तीन दिवसीय कार्यक्रम में भक्त हुए शामिल, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए




पाकुड़ जिला मुख्यालय के ब्याहुत विवाह भवन में भगवान बलभद्र का 36वां तीन दिवसीय पूजन कार्यक्रम सोमवार को पूरा हो गया। इसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग और भक्त शामिल हुए। ब्याहुत संघ ने पाकुड़ शहर के ब्याहुत विवाह भवन में भगवान बलभद्र की जयंती पर यह तीन दिवसीय पूजन कार्यक्रम रखा था। इस दौरान शहर के शिव शीतला मंदिर प्रांगण में मौजूद भगवान बलभद्र की प्रतिमा की पूजा पुरोहितों ने पूरे विधि-विधान से की। पूजा के साथ प्रसाद बांटा गया कार्यक्रम के तहत शनिवार रात को विवाह भवन में महिलाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। रविवार सुबह से भी कई आयोजन हुए। इनमें भगवान बलभद्र की पूजा के साथ प्रसाद बांटा गया। इसके बाद मिलन कार्यक्रम भी हुआ। मिलन कार्यक्रम में सामाजिक कामों को ज्यादा से ज्यादा करने पर जोर दिया गया। शिक्षा और संस्कारों पर भी खास ध्यान देने की बात कही गई। भगवान बलभद्र के जीवन के बारे में बताया गया कि बलराम भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई हैं। उन्हें शेषनाग (आदि शेष) का अवतार माना जाता है। उन्हें हलधर, बलभद्र और संकर्षण भी कहते हैं। बलभद्र जयंती भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। इस मौके पर सामूहिक भोज भी रखा गया। इसमें लोगों ने कई तरह के पकवानों का स्वाद लिया। शाम से रात तक बच्चों और दूसरे कलाकारों ने भक्ति गीत-संगीत के कार्यक्रम पेश किए। कार्यक्रम के आखिर में कलाकारों को सम्मानित किया गया। पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा सोमवार सुबह से शिव शीतला मंदिर में समापन कार्यक्रम के तहत भगवान बलभद्र की पूजा की गई। आरती हुई और प्रसाद बांटा गया। इसके बाद कलश विसर्जन कर कार्यक्रम के खत्म होने का ऐलान किया गया। जिले के अलग-अलग प्रखंडों में भी भगवान बलभद्र की पूजा हुई। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में अशोक भगत, अशोक प्रसाद भगत, काली शंकर भगत, मुकेश भगत, सनी भगत, किसन भगत, प्रदीप भगत, शंकर भगत, कैलाश भगत, तारकेश्वर भगत, ललन भगत और विश्वनाथ भगत समेत कई लोगों ने खास भूमिका निभाई।



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