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पानीपत में फर्जी जमानत का खुलासा:आधार कार्ड बदलकर दूसरी संपत्ति पर ली जमानत, कोर्ट के आदेश पर नंबरदार सहित फर्जी गारंटर पर FIR




पानीपत की अदालत में एक फर्जी जमानत का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। रेप के मामले की सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति के नाम पर फर्जी आधार कार्ड और संपत्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आरोपी की जमानत कराने का भंडाफोड़ हुआ है। अदालत के सख्त आदेश के बाद थाना चांदनीबाग पुलिस स्टेशन में फर्जी गारंटर और उसकी पहचान करने वाले बाबेलपुर गांव के नंबरदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। ये है मामला मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबरदीप सिंह की अदालत का है। सुनवाई के दौरान आरोपी रिजवान के गारंटर के रूप में फरीदपुर निवासी राकेश को नोटिस जारी कर कोर्ट में पेश होने को कहा गया था। अदालत में पेश होकर राकेश ने लिखित बयान दिया कि उसने आरोपी ऋषपाल के लिए कभी कोई जमानत या मुचलका भरा ही नहीं है। उसने बताया कि जमानत के कागजातों में लगाई गई संपत्ति तो उसकी है, लेकिन उसमें इस्तेमाल किया गया आधार कार्ड उसका नहीं है। किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसकी पहचान चुराकर और फर्जी दस्तावेज तैयार कर कोर्ट में फर्जी जमानत दर्ज कराई है। नंबरदार बलराम और फर्जी गारंटर पर एफआईआर के आदेश राकेश के बयान और फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद अदालत ने मामले को बेहद गंभीर माना। जज अंबरदीप सिंह ने तुरंत प्रभाव से आदेश की प्रति और जमानत दस्तावेजों की कॉपी संबंधित थाना प्रभारी को भेजने के निर्देश दिए। कोर्ट ने फर्जी जमानत देने वाले अज्ञात व्यक्ति और उसकी पहचान करने वाले बाबैल गांव के नंबरदार बलराम के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की गहन जांच करने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने धारा 318(4), 338, 336(3) और 340(2) BNS (धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज बनाने से जुड़ी धाराएं) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। जेल प्रबंधन की लापरवाही से कटी थी निर्दोष की जमानत, कोर्ट ने सुधारी गलती इसी मामले में एक और अहम घटनाक्रम में, आरोपी महताब की जमानत बहाली पर भी फैसला सुनाया गया। 30 अगस्त 2024 को जेल प्रशासन ने अदालत को गलत सूचना दे दी थी कि महताब जमानत पर बाहर है और जेल में बंद नहीं है, जिसके कारण कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर मुचलके जब्त कर लिए थे। सुनवाई के दौरान जब कस्टडी सर्टिफिकेट की जांच की गई और नायब कोर्ट अनिल ने जिला जेल पानीपत से दूरभाष पर पुष्टि की, तो खुलासा हुआ कि महताब 27 जुलाई 2024 से लगातार जेल में ही बंद था। जेल प्रशासन की गलत रिपोर्ट के कारण उसकी जमानत रद्द हुई थी। अदालत ने अपनी गलती को सुधारते हुए आरोपी महताब के जमानत और मुचलके बहाल कर दिए और उसकी रिहाई के आदेश जारी किए। भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया (उद्घोषण) शुरू मामले का तीसरा आरोपी ऋषपाल लगातार अदालत से गैरहाजिर चल रहा है। उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट तामील नहीं हो सका। इसके बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी ऋषपाल के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत उद्घोषणा जारी करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तारीख तय की गई है।



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