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बाड़ेबंदी में 'किडनैप-केस', पुलिस पर बरसे MLA:कांग्रेस नेता बोले-डोटासरा जी को सद्बुद्धि मिले; चौथी तक पढ़े 'गणितज्ञ' के पहाड़े




नमस्कार, चोर-उचक्कों को छोड़कर पुलिस ‘बाड़ों’ में घुसकर प्रत्याशी तलाश रही है। एक बाड़े में घुसी तो विधायक जी चिल्ला पड़े। चुनावी मौसम में राजनीतिक मकसद से धार्मिक काम भी जोरों से चल रहे हैं। कोई दूसरों की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ कर रहा है, कोई अपनों के लिए। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. कांग्रेस के ‘बाड़े’ में घुसी पुलिस पर चिल्लाए विधायक जी बाड़ाबंदी न हुई नाथी का बाड़ा हो गया। पुलिस कभी भी मुंह उठाकर चली आती है। पुलिस नहीं आती तो अफसर आ धमकते हैं। रिसोर्ट का नाप-जोख लेने लगते हैं। किसी प्रत्याशी का होटल सीज करने की धमकी दी जाती है। बाकी निगमों-निकायों की तर्ज पर हनुमानगढ़ की संगरिया नगर पालिका के कांग्रेस पार्षदों की भी बाड़ाबंदी हुई। संगरिया विधायक को राजस्थान पुलिस पर पूरा भरोसा था कि परेशान करेगी। इसलिए वे अपने पार्षद-गण को लेकर पंजाब पहुंच गए। सोचा था कि यहां तक पुलिस नहीं पहुंचेगी। लेकिन संगरिया पुलिस ने रात 3 बजे घंटी बजा दी। बोली कि दो पार्षद ऐसे हैं जिनकी किडनैपिंग का केस दर्ज कराया गया है। रिसोर्ट में हल्ला मच गया। सभी पार्षद जुट गए। वहां विधायक जी भी मौजूद थे। विधायक जी का पारा सातवें आसमान तक पहुंच गया। जमकर खरी-खोटी सुनाई। बोले- सब समझते हैं किसके इशारे पर चल रहे हो। आपस में घुस-मुस होने लगी कि दो पार्षद ले जाकर क्रॉस वोटिंग कराएंगे। पुलिस ने पार्षद को बताया- भैये, तेरे ही सगे भाई ने किडनैप होने का मामला दर्ज कराया है। पार्षद बोला- उस पर जरूर दबाव बनाया होगा। मामला बढ़ता देख पुलिस भी बैकफुट पर आई। विधायक जी ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया- संगरिया थाना घेर लो। भोर होते होते संगरिया थाने के सामने कार्यकर्ता बैठे ‘हाय-हाय’ के नारे लगा रहे थे। चर्चा है कि चोर-उचक्कों से ज्यादा पुलिस को इन दिनों पार्षदों की तलाश है। 2. यज्ञ, हवन और पानी में तपस्या इधर निकायों में बोर्ड और मेयर-सभापति बनाने के लिए सभी तरह के समीकरण यानी कि हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। मामला धर्म-कर्म तक पहुंच चुका है। अजमेर में कांग्रेस कार्यालय से यज्ञ-हवन का मंत्रोच्चार उठा तो हर कोई ठिठकने लगा। क्या हो रहा है भाईसाहब? जवाब था- अमुक पार्टी की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ कर रहे हैं। भगवान की भी चुनाव में ड्यूटी लगती है। एक देवता सद्बुद्धि बांटने के लिए तय कर दिया जाता होगा। यज्ञ को लेकर फलां नेताजी ने कहा- हमारी प्रत्याशी किरण गढवाल का पर्चा खारिज कराने के लिए उस पार्टी ने हर तरह का हथकंडा अपना लिया। रातों-रात फाइलें गायब हो गईं। पूरा जोर लगा दिया। यह अलोकतांत्रिक है। भगवान उन्हें सद्बुद्धि दे। इधर पुष्कर के पास बीजेपी के पार्षद भी बाड़ेबंदी में है। यहां तक पुलिस या इमारत की नाप-जोख करने वाले अफसरों की पहुंच का डर नहीं। ऐसे में पार्षद स्विमिंग पूल में तपस्या कर रहे हैं। निश्चिंत हैं कि बोर्ड तो हमारा ही बनेगा और सभापति भी। लिहाजा नृत्य और जश्न की प्रैक्टिस की जा रही है। भीलवाड़ा के कांग्रेस दफ्तर में भी हवन का धुआं उठता दिखा। पहले तो लगा कि यहां भी अमुक पार्टी की सद्बुद्धि के लिए धार्मिक आह्वान किया जा रहा है। लेकिन नहीं। यहां माजरा उल्टा निकला। पीसीसी सदस्य खुद पीसीसी चीफ के लिए ईश्वर से अक्ल की मांग कर रहे थे बोले- डोटासरा और प्रभारी जी कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों को सिंबल तक नहीं दिला सके। इसलिए पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। वे कंप्रोमाइज हो गए। भगवान उन्हें… 3. जूनियर गुढ़ा की ‘लॉन्चिंग’ उनका नाम राजेंद्र गुढ़ा है। वे बढ़िया नेता हैं। जनता के बीच रहते हैं। जनता के हक के लिए दीवारों पर चढ़ जाते हैं। दरवाजे लांघ जाते हैं। पुलिस को चैलेंज कर देते हैं। कहीं भी धरना दे देते हैं। बस उन्हें जमीन ढंग की नहीं मिली। जमीन की तलाश में वे पार्टी दर पार्टी इधर उधर घूमते रहे। सारी पार्टियों का स्वाद चखने के बाद वन मैन आर्मी बन गए। अब उन्हें अपनी विरासत अगली पीढ़ी को देने की चिंता है। यूं तो इसका इंतजाम वे पहले से कर चुके हैं। बेटे के लिए बर्थडे पर हर साल बड़ी पार्टी ऑर्गनाइज की जाती है। फॉर्म हाउस की इस पार्टी में देश के दिग्गजों ने मौजूदगी दर्ज कराई है। फिर भी सीनियर गुढ़ा चाहते हैं कि बेटा धमाके के साथ सही जमीन पर लॉन्च हो। इस बार चुनाव के दिन बेटे का बर्थडे आने के कारण सेलिब्रेट नहीं किया गया। ऐसे में पिताजी ने तय किया कि बेटे को सिखाया जाए कि ऊंचाई पर कैसे पहुंचते हैं और फिर लॉन्च कैसे होते हैं। जूनियर गुढ़ा को लेकर सीनियर गुढ़ा आबूरोड पहुंच गए। वहां स्काई डाइविंग की तैयारी हुई। पहले सीनियर गुढ़ा ने हवा का रुख भांपा। बीस हजार फीट की ऊंचाई से कूद पड़े। फिर बेटे को उसी ऊंचाई से पैराशूट के माध्यम से कुदा दिया। बेटा जब नीचे आ रहा था तो पिता यही सोच रहे होंगे कि लैंड होने के लिए जमीन बेहतर होनी चाहिए। वैसे जूनियर गुढ़ा अपनी तरफ से भी तैयारी किए हुए हैं। राजस्थान के लोकदेवताओं को लेकर खूब धार्मिक वीडियो बना रहे हैं। 4. चलते-चलते…. एक कॉमिक्स में चाचा चौधरी नाम के करेक्टर के लिए यह बात फेमस थी- चाचा चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज है। नागौर की रियां तहसील के छोटे से गांव लांपोलाई के किसान तुलसाराम जाखड़ उन्हीं चाचा चौधरी की याद दिलाते हैं। कह सकते हैं कि चाचा तुलसाराम चौधरी का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है। 82 साल के तुलसाराम किसी भी संख्या का वर्गमूल निकाल सकते हैं। हजारों में किसी भी संख्या का पहाड़ा यानी टेबल सुना सकते हैं। वह भी चंद सेकेंड में। राज्यपाल के सामने उन्होंने 365 का पहाड़ा सुना दिया। खेत में काम करते वक्त किसी ने 9649 का पहाड़ा पूछ लिया। सेकेंडों में यह पहाड़ा भी सुना दिया। चौथी क्लास तक पढ़े तुलसाराम को बचपन से ही गणित पढ़ने का शौक था। पचास साल से गांव के लोग जमीन की पैमाइश के लिए उनके पास आते हैं। जितनी देर में पटवारी कागज कलम संभालता है, उनती देर में तो वे खड़े-खड़े पैमाइश कर देते हैं। किसी से एक रुपया नहीं लेते। गणित के अद्भुत शौक के कारण उन्हें गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। वे खुद बताते हैं- एक बार सांसद दुष्यंत सिंह ने 999 का पहाड़ा पूछ लिया। मैंने तुरंत सुना दिया। फिलहाल तो राजनीतिक दल पार्षदों के पहाड़े में उलझे हैं। राजनीति के गुणा-भाग के दूर एक किसान की यह प्रतिभा सुखद एहसास कराती है। हजारों रुपए खर्च कर कॉन्वेंट स्कूल में जाने वाले बच्चे तुलसाराम जी के पास गणित की ट्रिक्स सीखने आते हैं। इनपुट सहयोग- मनीष जैन (भीलवाड़ा), नरेश भाटी (चूरू), भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।



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