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घर खरीदने वालों के पैसे नहीं लौटने वाले डिफॉल्टर बिल्डरों पर शिकंजा कसने की रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की कोशिशों पर पानी फिर रहा है। रेरा की ओर से जारी होने वाले राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (आरआरसी) का कोई असर बिल्डरों पर नहीं है। जिलों के कलेक्टर उसकी वसूली ही नहीं करवा पा रहे। मार्च 2026 के आंकड़े हैं कि ढाई हजार के करीब केसों में 393.37 करोड़ की वसूली नहीं हुई है। इनमें इंदौर के 951 केस में निवेशकों के 116 करोड़ फंसे हुए हैं। वहीं भोपाल में एक हजार आरआरसी जारी हुई हैं, जिसका करीब 212 करोड़ बिल्डर नहीं दे रहे। आरआरसी की व्यवस्था है कि यदि कोई बिल्डर डिफाॅल्टर हो जाए तो रेरा उसके खिलाफ और खरीदार के पक्ष में वसूली आदेश जारी करके जिला प्रशासन को भेजता है। संबंधित जिलों के कलेक्टर और तहसीलदारों को इसकी वसूली करानी होती है। बिल्डर पैसे न दे तो जिला प्रशासन को उसकी जब्त करने और उसे जेल भेजने तक के अधिकार हैं। पर वसूली नहीं हो रही। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास जब ये मामले पहुंचे तो उन्होंने एक नोटशीट विभाग के उच्च अफसर को भेजी और कहा कि आरआरसी वसूली के लिए समयसीमा तय की जाए। विभाग की ओर से तुरंत निर्देश भी जिला प्रशासन को भेजे हैं। कुछ खास मामले जिनमें फंसा खरीदारों का पैसा ग्वालियर…एसीएस ने कलेक्टर को भेजा पत्र
ग्वालियर निवासी संतोष कुमार बादल के पक्ष में 40 लाख 952 रुपए वसूल करके जिला प्रशासन को देना है। रेरा की आरआरसी जारी हुए 22 महीने हो गए, लेकिन बादल को पैसा नहीं मिला। वे कई बार सीएम हेल्प लाइन में भी आवेदन कर चुके लेकिन कुछ नहीं हुआ। हाल ही में 10 जुलाई को संतोष ने सीएम को पत्र लिख दिया। तीन लोगों के सवा करोड़ उलझे जबलपुर जिले में दो बिल्डरों के द्वारा तीन खरीदारों के करीब सवा करोड़ रुपए रोके गए हैं। मप्र रेरा ने इनके लिए दो साल पहले रेवेन्यु रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया था। बिल्डरों की ओर से सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने से भी रोका जा रहा है। तीनों लोग कलेक्टर से लेकर तहसीलदार तक को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन न तो बिल्डर की संपत्ति कुर्क की गई है और न ही उन्हें रोका गया।
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बिल्डरों के पास फंसे खरीदारों के 393 करोड़:इंदौर के 951 केस में निवेशकों के 116 करोड़, आधी रकम अकेले भोपाल की
