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भोले की कांवड़ लेने पहुंचा हरियाणा का नंदी:पीठ पर गंगाजल, वरना गाड़ी में चारा; 400 KM पैदल चलकर मंदिर में जलाभिषेक करेगा




हरियाणा की एक अनोखी नंदी कांवड़ इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। भगवान शिव के वाहन नंदी की यह कांवड़ यात्रा जहां-जहां से गुजर रही है, वहां लोग दर्शन करने के लिए उमड़ रहे हैं। सिरसा के कुछ युवक नंदी को लेकर कांवड़ लेने हरिद्वार पहुंचे। हरिद्वार से जल लेकर नंदी के साथ-साथ पैदल लौट रहे हैं। पूरे रास्ते नंदी की पीठ पर ही गंगाजल रखा गया है। शिवरात्रि पर ग्रामीण नंदी के साथ ही जलाभिषेक करेंगे। गुरुवार को नंदी के साथ कैथल पहुंचे कांवड़ियों ने बताया कि हर बार अकेले कांवड़ लेने जाते थे, इस बार गांव के नंदी को भी हरिद्वार में गंगाजी में ले जाने का प्लान बनाया। गंगाजी में नंदी को नहलाया भी गया। रास्ते में नंदी के साथ हुंडई वरना गाड़ी भी चल रही है। इस गाड़ी में नंदी के चारा और दाने की व्यवस्था की गई है। नंदी की यात्रा की 2 तस्वीरें:- 9 कांवड़ियों की टोली, पीछे गाड़ी में चारा सिरसा के कालावाली मंडी गांव के 9 कांवड़ियों की टोली ने इस सावन भी हरिद्वार से कांवड़ लाने का प्लान बनाया। नंदी के साथ चल रहे रोशन लाल ने बताया कि नंदी गांव कई साल से गांव की गलियों में ही घूमता रहता है। इस बार नंदी को भी कांवड़ यात्रा में ले जाने की योजना बनाई। 500 किलोमीटर की यात्रा, गंगाजी में स्नान रोशन लाल ने बताया कि गांव से हरिद्वार की दूरी करीब 400 किलोमीटर पड़ती है। 10 दिन पहले वे पिकअप गाड़ी में नंदी को लेकर हरिद्वार पहुंचे। यहां नंदी को गंगाजी में स्नान कराकर घाट पर ही पूजा पाठ की गई। इसके बाद पीठ पर गंगाजल रखकर वहां से करीब एक सप्ताह पहले सिरसा के लिए रवाना हुए। गर्मी में आटा और दलिया का सेवन रोशन लाल के अनुसार, हरिद्वार से वे अब तक 200 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। रात में किसी भी शिविर में आराम करने के लिए रुक जाते हैं। शिविर के बाहर ही खूंटा गाड़कर नंदी को बांध देते हैं। रात के समय ही नंदी को भोजन में आटा, दलिया और चारा देते हैं। सुबह फिर दोबारा यात्रा शुरू कर देते हैं। सुबह-शाम सफर, दोपहर में आराम नंदी के साथ सभी कांवड़िये सुबह सूरज निकलने से पहले ही शिविर से निकल जाते हैं। जिससे दोपहर में गर्मी में न चलना पड़े। रोशन लाल ने बताया कि वे नंदी के लिए करीब 200 किलो आटा और दलिया लेकर गए थे, मगर अभी तक आधा भी खत्म नहीं हुआ। जिस कांवड़ शिविर में भी रुकते हैं, वहां संचालक खुद नंदी के खाने का प्रबंध करते हैं। गांव के मंदिर में बसेरा, यहीं जलाभिषेक होगा जब कांवड़ियों से नंदी के नियंत्रण को लेकर बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि नंदी का शांत स्वभाव है। गांव के मंदिर में ही नंदी का बसेरा है। कांवड़ यात्रा पूरी होने के बाद मंदिर में नंदी को रखा जाएगा। कांवड़ यात्रा को लेकर पूरे गांव में उत्साह है। अब शिवरात्रि पर मंदिर में जलाभिषेक करेंगे।



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