मोहली में दुष्कर्म मामले में कार्रवाई को लेकर हाईवे जाम:FIR के बाद भी आरोपियों ​की गिरफ्तारी नहीं, रसूख के चलते बचाने का आरोप




फाजिल्का स्थानीय खजूरमंडी क्षेत्र में अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ कथित तौर पर हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में न्याय की मांग लगातार तेज होती जा रही है। इलाके में प्रसारित हुए एक पर्चे (लीफलेट) के माध्यम से यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि मामले में नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है। इसे लेकर स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों द्वारा सरकार व पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोपियों के सामाजिक रसूख के कारण देरी का आरोप सोशल मीडिया और सार्वजनिक रूप से सामने आए इस पर्चे में दावा किया गया है कि आरोपी एक रसूखदार समुदाय से संबंध रखते हैं और उनके मजबूत सामाजिक व राजनीतिक प्रभाव के कारण ही पुलिस कार्रवाई करने में देरी कर रही है। हालांकि, इन दावों और आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। इस पूरे संवेदनशील मामले में स्थानीय पुलिस का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग पीड़िता के पक्ष में न्याय की आवाज उठाने वाले विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने मांग की है कि कानून सबके लिए बराबर है। पीड़िता की जाति या आरोपियों के सामाजिक व आर्थिक प्रभाव को दरकिनार कर, कानून के अनुसार पूरी तरह निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।” प्रदर्शनकारियों और शुभचिंतकों ने मांग की है कि इस संवेदनशील मुकदमे की सुनवाई ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ में करवाई जाए ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को आवश्यक कानूनी सहायता, प्रशासनिक संरक्षण और सुरक्षा मुहैया कराने की भी पुरजोर मांग की गई है। ‘पीड़िता को दोषी ठहराने’ वाली मानसिकता का कड़ा विरोध पर्चे के जरिए समाज में व्याप्त उस दकियानूसी मानसिकता पर भी तीखा प्रहार किया गया है, जो ऐसे गंभीर अपराधों के लिए पीड़िता को ही दोषी ठहराने की कोशिश करती है। आम जनता से पुरजोर अपील की गई है कि वे घटना के समय, पीड़िता के पहनावे या उसके बाहर निकलने के वक्त पर सवाल उठाने जैसी संकीर्ण सोच को छोड़कर, पीड़िता और उसके परिवार के साथ मजबूती से खड़े हों। इसके साथ ही, ग्रामीण और कस्बाती क्षेत्रों में महिलाओं व बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन से ठोस और कड़े कदम उठाने की मांग की गई है।



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