Headlines

रायबरेली में 18 साल बाद होगा सर्कस का आगाज:फायर एक्ट और फ्लाइंग ट्रैपीज होंगे मुख्य आकर्षण, बच्चों को 50% तक की छूट




रायबरेली के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में सोमवार को करीब 15 एकड़ जमीन पर ग्रेट राज सर्कस का आगाज हो रहा है। शहरवासियों के लिए करीब 18 साल बाद मनोरंजन का नया विकल्प मिलने जा रहा है। इसका उद्घाटन सोमवार को सदर विधायक अदिति सिंह फीता काटकर करेंगी। आयोजकों के मुताबिक, सर्कस में पारंपरिक करतबों के साथ आधुनिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलेंगी। सर्कस में रोजाना तीन शो होंगे। पहला शो दोपहर 1 बजे, दूसरा शाम 4 बजे और तीसरा शाम 7:30 बजे शुरू होगा। आयोजकों का कहना है कि महानगरों में इसी तरह के शो के टिकट 400 से 500 रुपए तक होते हैं, लेकिन रायबरेली के दर्शकों को ध्यान में रखते हुए टिकट की कीमतें कम रखी गई हैं। स्कूली बच्चों के लिए 50% तक की छूट सर्कस प्रबंधन ने स्कूली छात्रों के लिए 50 प्रतिशत तक की विशेष छूट देने की घोषणा की है। बच्चों के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक विशेष शो भी आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य बच्चों को भीड़ से अलग सुरक्षित और आरामदायक माहौल में सर्कस देखने का मौका देना है। फायर एक्ट और फ्लाइंग ट्रैपीज दिखाएंगे रोमांच सर्कस से पिछले करीब 40 वर्षों से जुड़े आयोजकों ने बताया कि बदलते दौर के साथ प्रस्तुतियों में भी बदलाव किया गया है। इस बार करीब 6 फीट तक आग निकालने वाला विशेष फायर एक्ट और फ्लाइंग ट्रैपीज प्रमुख आकर्षण होंगे। फ्लाइंग ट्रैपीज में कलाकार हवा में झूलों पर कलाबाजी करते हैं। आयोजकों के मुताबिक, सर्कस संस्थान का इतिहास 65 वर्षों से भी अधिक पुराना है। उनका कहना है कि सर्कस में अब ऐसे करतब और प्रस्तुतियां शामिल की जा रही हैं, जो आधुनिक दर्शकों की पसंद के अनुरूप हों। जानवरों पर रोक से सर्कस उद्योग के सामने आर्थिक संकट साक्षात्कार के दौरान आयोजकों ने सर्कस में जानवरों के इस्तेमाल पर लगी सरकारी पाबंदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध के बाद सर्कस उद्योग आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा है। आयोजकों ने चिंता जताई कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो आने वाली पीढ़ियां सर्कस को केवल किताबों और पुरानी यादों में ही देख पाएंगी। 1999 में हाथी ने महावत को पटककर मार डाला था रायबरेली में सर्कस के इतिहास से जुड़ी एक दर्दनाक घटना भी सामने आती है। वासी नकवी नेशनल इंटर कॉलेज के मैदान में वर्ष 1999 में महाराज सर्कस लगाया गया था। उस दौरान सर्कस के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हाथी का संतुलन बिगड़ गया था। बताया जाता है कि हाथी ने अपने महावत को पटक-पटककर मार डाला था। इस घटना के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने वन्यजीवों के साथ सर्कस के आयोजन की अनुमति पर रोक लगा दी थी। 2008 में भी 15 दिन में बंद हो गया था सर्कस इसके करीब नौ साल बाद वर्ष 2008 में जेमिनी सर्कस ने राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में फिर दस्तक दी। शुरुआत में हाथी और घोड़ों के साथ सर्कस के कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन विरोध के बाद करीब 15 दिन के भीतर सर्कस पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद रायबरेली में लंबे समय तक बड़े सर्कस का आयोजन नहीं हुआ। अब करीब 18 साल बाद सर्कस की वापसी से शहरवासियों में उत्सुकता है। आयोजकों को उम्मीद है कि आधुनिक प्रस्तुतियों और किफायती टिकटों के कारण दर्शकों को यह आयोजन पसंद आएगा। सुरक्षा के लिए दो सब इंस्पेक्टर समेत 12 पुलिसकर्मी तैनात सीओ सदर आशीष निगम ने बताया कि सर्कस में आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इसमें दो सब इंस्पेक्टर समेत करीब एक दर्जन महिला और पुरुष पुलिसकर्मी शामिल हैं। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी समय-समय पर बदली जाती रहेगी, ताकि सुरक्षा व्यवस्था लगातार बनी रहे। सिटी मजिस्ट्रेट राम अवतार ने बताया कि सर्कस के आयोजक सचिन की ओर से आयोजन के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। इसके बाद संबंधित विभागों से आवश्यक एनओसी प्राप्त की गई। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से सर्कस लगाने की अनुमति दी गई है। ————————— ये इंटरव्यू भी पढ़िए – रोहिणी बोलीं- चुनाव लड़ने नहीं, लड़वाने आई हूं, वाल्मीकियों को हिस्सेदारी देने वाले को समर्थन देंगे स्विट्जरलैंड में 6 साल बिताने के बाद भारत लौटीं रोहिणी घावरी अब अपने वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने और स्विट्जरलैंड में 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। दिल्ली, हरियाणा और मेरठ के बाद वे लखनऊ पहुंचीं। पढ़िए पूरी खबर…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *