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रूंझ और मझगांय बांध परियोजनाओं में विस्थापित हो रहे गरीब और आदिवासी परिवारों के हक, पुनर्वास और मुआवजे में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है। पन्ना नगर पालिका परिषद के वार्ड 14 से पार्षद वैभव थापक ने गुरुवार को इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने प्रेस वार्ता कर 5 सवाल पूछे और 10 सूत्रीय मांगों को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, मृतका रमिया आदिवासी का परिवार आज भी अपने 75 लाख रुपए के मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।विकास और पुनर्वास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, रमिया आदिवासी के परिवार को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। रमिया के नाती दासी लाल आदिवासी ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनका निजी 7.50 लाख रुपए का पुनर्वास पैकेज और मकान का मुआवजा रोक दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि दादी रमिया के बड़े बेटे को भी नियमानुसार मिलने वाला पुनर्वास पैकेज नहीं मिला है। सहायता न मिलने के कारण उनका परिवार बेघर होने की कगार पर है और पाई-पाई को मोहताज है। सूची सार्वजनिक क्यों नहीं हुई पार्षद वैभव थापक ने सरकार से सीधे 5 सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि विस्थापित और प्रभावित आदिवासी परिवारों की गांववार सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है? जमीन, मकान, पेड़ और फसलों के मुआवजे का निर्धारण स्वतंत्र रूप से सत्यापित हुआ है या नहीं? क्या विस्थापन से पहले पुनर्वास की सभी सुविधाएं जमीन पर उपलब्ध कराई गई हैं? थापक ने यह भी पूछा कि मुआवजा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद सरकार पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं करा रही है? साथ ही, हाल ही में रिश्वत लेते पकड़े गए पटवारी के अलावा, इस पूरे मामले में शामिल बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या नहीं? लोकायुक्त ट्रैप के बाद ये सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। विशेष जनसुनवाई हो उन्होंने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच, ग्रामवार सूची सार्वजनिक करने, कम मुआवजे की शिकायतों पर पुनर्मूल्यांकन, जमीन के साथ कुएं, पेड़ और फसल का पूरा मूल्यांकन देने, मूलभूत सुविधाएं दिए बिना विस्थापन न करने और प्रभावितों के लिए विशेष जनसुनवाई आयोजित करने की मांग शामिल है।
अगर पारदर्शी न्याय नहीं मिला तो आंदोलन होगा उग्र: वैभव थापक
”रूंझ और मझगांय बांध परियोजना से सबसे ज्यादा हमारे गरीब और आदिवासी भाई-बहन प्रभावित हो रहे हैं। मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हो रहा है। लोकायुक्त की कार्रवाई से यह साबित हो चुका है कि धरातल पर किस तरह का भ्रष्टाचार चल रहा है। यदि सरकार ने पारदर्शी तरीके से प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं दिलाया, तो हम इस लड़ाई को और उग्र करेंगे।”
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