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रेवाड़ी में डीसी के आदेश पर सरपंच निलंबित,:बहुमत वाला पंच संभालेगा पंचायत की कमान




रेवाड़ी जिले के डहीना खंड के गांव मसीत के सरपंच अशोक को उपायुक्त अभिषेक मीणा ने पद से निलंबित कर दिया है। सरपंच पर राजस्व रिकॉर्ड के विपरीत जाकर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना रास्ता नंबर R-20 का निर्माण और विस्तार कराने का आरोप है। शिकायत की जांच, एसडीएम कोसली की रिपोर्ट और सरपंच के जवाब का अवलोकन करने के बाद डीसी ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(1)(बी) के तहत कार्रवाई की है। आदेश में कहा गया है कि सरपंच अपने पद का ठीक प्रकार से निर्वहन नहीं कर रहे थे और उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। निलंबन के बाद सरपंच ग्राम पंचायत की किसी भी बैठक में भाग नहीं ले सकेंगे। डीसी ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, डहीना को निर्देश दिए हैं कि निलंबित सरपंच से तुरंत ग्राम पंचायत का चार्ज और संपत्ति व सामान लिया जाए। इसके बाद हरियाणा पंचायती राज अधिनियम की धारा 51(2) के तहत पंचायत के किसी बहुमत वाले पंच को चार्ज सौंपा जाए। ये आदेश 8 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए हैं। हजारीलाल की शिकायत पर शुरू हुई थी जांच गांव मसीत निवासी हजारीलाल पुत्र नंदराम ने सरपंच अशोक के खिलाफ शिकायत देकर रास्ते के निर्माण और विस्तार पर सवाल उठाए थे। शिकायत पर 25 फरवरी 2026 को कार्यालय की ओर से एसडीएम कोसली को जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजने को कहा गया था। एसडीएम की 20 मई 2026 की जांच रिपोर्ट के आधार पर सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया था कि सरपंच ने राजस्व रिकॉर्ड के विपरीत पंचायत की बचत भूमि के प्लॉट नंबर 277 और 364 पर रास्ता नंबर R-20 का निर्माण और विस्तार कराया। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व प्रशासनिक या तकनीकी स्वीकृति नहीं ली गई। शिकायत में इसे पंचायत के हितों के विपरीत बताते हुए वित्तीय नुकसान और पद के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया गया था। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि रास्ते को लेकर विवाद की स्थिति में सरपंच को निर्माण या विस्तार पर रोक लगाकर राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी चाहिए थी। जांच में कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही का आरोप लगाया गया था। सरपंच ने कहा- R-20 का निर्माण नहीं कराया सरपंच अशोक ने 8 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया था। इसके बाद उन्हें निजी सुनवाई का अवसर दिया गया। सुनवाई के दौरान सरपंच ने कहा कि उन्होंने रास्ता नंबर 144 को पक्का करवाया है, जबकि रास्ता R-20 की न तो मरम्मत कराई और न ही नया निर्माण कराया। उन्होंने आरोपों को निराधार बताया। न्यायालय में लंबित मामले के संबंध में सरपंच ने कहा कि ग्राम पंचायत उस केस में पक्षकार नहीं है और न ही उसे न्यायालय की ओर से कोई आदेश दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण उनसे गलती हुई और जानबूझकर कोई लापरवाही नहीं की गई। उन्होंने मामले को समाप्त करने का अनुरोध किया था। डीसी ने निलंबित के आदेश किए जारी निजी सुनवाई के बाद प्रशासन ने सरपंच के जवाब पर एसडीएम कोसली से टिप्पणी मांगी। एसडीएम की 6 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि रास्ता नंबर R-20 को रास्ता नंबर 144 से जोड़ने के लिए विस्तार का कार्य सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता नंबर 144 की चौड़ाई 11 फीट निर्धारित है। डीसी ने दोनों जांच रिपोर्टों, सरपंच के जवाब, निजी सुनवाई और मूल रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद जवाब को संतोषजनक नहीं माना। आदेश में कहा गया कि सरपंच ऐसा कोई संतोषजनक जवाब या सबूत प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप निराधार साबित होते। इसी आधार पर उन्हें पद से निलंबित करने का फैसला लिया गया। सरपंच बोले: उन्हें नहीं है जानकारी गांव के सरपंच अशोक कुमार का कहना है कि उनके पास निलंबन संबंधित कोई जानकारी नही आई है। आदेश की कॉपी मिलने के बाद ही इस विषय में कुछ बता पाएंगे।



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