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समस्तीपुर में दुर्गापूजा की तैयारियां अंतिम चरण में है। शहर के अलग-अलग इलाकों में भव्य पूजा पंडाल बनाया जा रहा है। 12 पत्थर मोहल्ले में स्थित शिवकली दुर्गा पूजा समिति का पूजा पंडाल इस बार आकर्षण का केंद्र बनेगा। समिति की ओर से शिरडी के साईं बाबा मंदिर के गुंबद की तर्ज पर 100 फीट ऊंचा भव्य पूजा पंडाल तैयार कराया जा रहा है। इसके निर्माण पर करीब 10 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। पंडाल को आकार देने में 15 कलाकारों की टीम पिछले एक महीने से दिन-रात जुटी है। छह पूजा तक पंडाल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। साल 2001 से हो रहा आयोजन पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवानंद बमबम ने बताया कि यहां साल 2001 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। खास बात यह है कि यहां मां दुर्गा की आराधना मिथिला पद्धति से की जाती है। पूजा-अर्चना कराने के लिए आचार्य ब्रजकिशोर झा और अवधेश झा आते हैं। दोनों विद्वानों ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से मां की पूजा से संबंधित विषय पर पीएचडी की है और विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। स्थानीय कलाकारों की मेहनत से आकार ले रहा पंडाल समिति के उपाध्यक्ष उमेश प्रसाद ने बताया कि इस बार पंडाल को शिरडी साईं बाबा मंदिर के गुंबद जैसा स्वरूप देने के साथ कोलकाता के भव्य पूजा पंडालों की झलक भी देने का प्रयास किया जा रहा है। निर्माण कार्य में स्थानीय कलाकार जुटे हैं। पिछले साल कलाकारों की पहल पर पंडाल को अबू धाबी स्थित दुर्गा मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया था। कलाकारों के अनुसार, सप्तमी की सुबह जब श्रद्धालु पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचेंगे, तब इसकी भव्य आकृति पूरी तरह सामने आएगी। मंदिर के गुंबद जैसी बनावट पंडाल का मुख्य आकर्षण होगी। मूर्ति निर्माण पर खर्च होंगे चार से पांच लाख इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण भी स्थानीय कलाकार कर रहे हैं। समिति के उपाध्यक्ष उमेश प्रसाद ने बताया कि ये कलाकार पहले चेन्नई में रहकर मूर्तिकला के क्षेत्र में काम करते थे। अब समस्तीपुर में ही प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। मूर्ति निर्माण पर करीब चार से पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे वॉलंटियर और पुलिसकर्मी शिवकली दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसे देखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए समिति के सदस्य वॉलंटियर के रूप में तैनात रहेंगे। साथ ही, नगर पुलिस के जवानों की तैनाती के लिए भी कहा गया है। समिति के अनुसार, इस पूजा पंडाल को पिछले कई वर्षों से स्वच्छ पूजा पंडाल का पुरस्कार मिलता रहा है। सूरदृष्टिहीन विजय पासवान ने शुरू की थी पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शिवानंद बमबम ने बताया कि इस पूजा की शुरुआत एक भावनात्मक प्रसंग से जुड़ी है। मोहल्ले के सूरदृष्टिहीन विजय पासवान अपने सीने पर कलश रखकर मां की आराधना करते थे। वर्ष 2001 में उनकी इच्छा पर सड़क किनारे कलश स्थापना कर पूजा शुरू की गई। मोहल्ले के लोगों ने सुझाव दिया कि जब कलश स्थापित हो ही गया है, तो मां की प्रतिमा भी स्थापित की जानी चाहिए। इसके बाद लोगों ने आपसी सहयोग से सप्तमी तक प्रतिमा की व्यवस्था कर दी। इसी के साथ यहां सामूहिक रूप से दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई और बाद में पूजा समिति का गठन किया गया। नेपाल में कराया आंख का ऑपरेशन समिति के सदस्यों ने बताया कि बाद में विजय पासवान को इलाज के लिए नेपाल के लहान ले जाया गया, जहां उनकी आंखों की रोशनी लौट आई। फिलहाल वह वैष्णो देवी में रहकर मां की सेवा में समर्पित हैं और फूल-माला बेचने का काम करते हैं।
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समस्तीपुर में बन रहा 100 फीट ऊंचा पूजा पंडाल:एक महीने से दिन-रात जुटे हैं 15 कलाकार, मिथिला पद्धति से होती है मां दुर्गा की अराधना
