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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर ढाई करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के क्लर्क को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। एएमयू के लोअर डिवीजन क्लर्क रहे आरोपी हशमत हुसैन की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। जस्टिस जय प्रकाश तिवारी की सिंगल बेंच ने आरोपी की तरफ से दाखिल छह याचिकाओं पर आदेश दिया। अलीगढ़ में जून 2026 में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर कई लोगों से रंगदारी मांगी गई थी। ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी दी गई थी। अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाने में आठ जून को छह मुकदमे दर्ज किए गए थे। लॉरेंस बिश्नोई के नाम से धमकी भरा पत्र लॉरेंस बिश्नोई का नाम लेकर दिल्ली से स्पीड पोस्ट के जरिए आठ धमकी भरे पत्र भेजे गए थे। पत्रों में खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताकर कुल ढाई करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। रंगदारी की रकम बिटकॉइन और दिए गए क्यूआर कोड के माध्यम से ट्रांसफर करने को कहा गया था। सभी एफआईआर में दो लोग नामजद हुए थे जिसमें सुनील कुमार यादव और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई शामिल थे। एएमयू क्लर्क हशमत गिरफ्तार हुआ था जांच के दौरान पुलिस ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित मुख्य डाकघर से मिली सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एएमयू के क्लर्क आरोपी हशमत हुसैन को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि हशमत हुसैन ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में करोड़ों हारने के बाद चढ़े कर्ज को चुकाने के लिए लॉरेंस बिश्नोई के नाम का सहारा लेकर डर फैलाने और धन उगाही की यह साजिश रची थी। हशमत के वकील ने कोर्ट में दी दलीलें कोर्ट में याची हशमत हुसैन के अधिवक्ता यावर मुख्तार ने कोर्ट को बताया कि याची के खिलाफ छह अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई थी। अधिवक्ता ने कहा कि याची हशमत हुसैन पूरी तरह बेगुनाह है और उसे किसी गलत मकसद से इस मामले में फंसाया गया है। चार्जशीट में साफ तौर पर कहा गया है कि नामजद आरोपी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साथ याची का कोई संबंध नहीं है। राज्य सरकार की ओर से जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी क्लर्क हशमत हुसैन की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
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लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर रंगदारी मांगने वाले को जमानत:ढाई करोड़ मांगने वाले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के क्लर्क को राहत
