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विदेशों तक डिमांड:पहली महिला किसान जो लाल-काला चावल उगा रहीं, धान की 65 देसी किस्मों के बीजों को सहेजा




जगदलपुर के गरावंड खुर्द गांव की प्रभाती भारत ने प्रदेश छत्तीसगढ़ की पहली महिला किसान बन गई हैं। उन्होंने व्यावसायिक स्तर पर ब्लैक राइस और रेड राइस की खेती शुरू की है। स्वास्थ्यवर्धक और उच्च बाजार मूल्य वाली इन विशेष धान किस्मों की खेती से अब बस्तर राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। प्रभाती भारत वर्तमान में चार एकड़ भूमि पर खेती कर रही हैं। दो एकड़ में ब्लैक राइस है। दो एकड़ में रेड राइस है। बेहतर गुणवत्ता और शुद्ध बीज उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से बीज मंगवाए हैं। मौसम अनुकूल रहा तो इस रकबे से करीब 60-70 क्विंटल से अधिक उत्पादन मिलने की उम्मीद है। प्रभाती भारत बताती हैं कि स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इन दोनों किस्मों की बाजार में अच्छी मांग है। बेहतर कीमत मिलने की भी पूरी संभावना है। रेड राइस का उपयोग विशेष रूप से मधुमेह के रोगियों के लिए लाभकारी माना जाता है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में वर्षों से लोग इसे नियमित भोजन का हिस्सा बना रहे हैं। वहां कई विशेषज्ञ सामान्य चावल की जगह रेड राइस खाने की सलाह देते हैं। इसी सोच को बस्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने यह प्रयोग शुरू किया है। किसानों को अधिक लाभकारी विकल्प उपलब्ध कराना भी लक्ष्य है। इस पूरे प्रयास में उन्हें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक दीपक शर्मा का तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है। बस्तर कृषि महाविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. सोनाली कर का मार्गदर्शन भी मिल रहा है। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग के अधिकारी भी समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते हैं। वे आवश्यक सलाह और सहयोग देते हैं। प्रभाती का मानना है कि वैज्ञानिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय ही भविष्य की टिकाऊ खेती का आधार बनेगा। ब्लैक राइस को सुपर फूड की श्रेणी में माना जाता है। इसमें एंथोसाइनिन, आयरन, प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। ये हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। रेड राइस में फाइबर, आयरन, जिंक और कई सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्य सफेद चावल की तुलना में कम होता है। इस कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी विकल्प है। प्रभाती भारत का सबसे बड़ा योगदान केवल नई फसल उगाना नहीं है। बस्तर की पारंपरिक धान विरासत को बचाना भी है। उन्होंने अब तक देसी धान की 450 से अधिक किस्मों को संरक्षित किया है। इनमें से 62 किस्मों के पेटेंट के लिए आवेदन भेजा जा चुका है। 32 अन्य किस्मों को भी पंजीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। उनका प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए देसी बीजों की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक और रेड राइस जैसी प्रीमियम धान किस्मों की मांग देश और विदेश, दोनों बाजारों में लगातार बढ़ रही है। बस्तर में इनका उत्पादन और ब्रांडिंग संगठित तरीके से हो तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के नोडल ऑफिसर पेटेंट और रजिस्ट्रेशन का काम देखते हैं। उन्होंने पुष्टि की है कि प्रभाती भारत प्रदेश में ब्लैक और रेड राइस की खेती करने वाली पहली महिला किसान हैं। वे सालों से देसी धान के संरक्षण के लिए काम कर रही हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रही हैं। प्रभाती भारत की यह अनूठी पहल न केवल महिला किसानों के लिए प्रेरणा है। यह भी साबित करती है कि बस्तर की कृषि परंपरा आधुनिक नवाचार के साथ नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है। इस नई शुरुआत और उन्नत किस्म के बीजों के संबंध में अधिक जानकारी के लिए प्रगतिशील महिला किसान प्रभाती भारत से सीधे उनके गांव गरावंड खुर्द में संपर्क किया जा सकता है।



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