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शाजापुर में अतिथि शिक्षक संघ ने रविवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने अपनी ही प्रतीकात्मक अर्थी बनाकर शहर में यात्रा निकाली और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह यात्रा दोपहर करीब 12 बजे बेरछा स्थित कृषि उपज मंडी से शुरू हुई। महुपुरा, किला रोड, छोटा चौक, आजाद चौक, नई सड़क और बस स्टैंड होते हुए यह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची। यहां अतिथि शिक्षकों ने प्रतीकात्मक रूप से अर्थी का दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। अतिथि शिक्षक संघ ने शासन से अतिथि शिक्षकों के लिए शीघ्र स्थायी नीति बनाने और उनकी लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। संघ का कहना है कि प्रदेश के अतिथि शिक्षक पिछले 18 वर्षों से अल्प मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। संघ के अनुसार, वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें सीधी भर्ती, प्रमोशन, ट्रांसफर और शासन की विभिन्न नीतियों के कारण अक्सर बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है। संघ के जिला अध्यक्ष आशीष शर्मा ने बताया कि अतिथि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। कई शिक्षक 70 से 80 किलोमीटर दूर जाकर भी नियमित रूप से अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन सहित अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। साथ ही, कई बार मानदेय का भुगतान भी समय पर नहीं होता। संघ ने मांग की है कि अतिथि शिक्षकों के पद स्थायी किए जाएं, उनका सेवाकाल 12 माह का किया जाए और समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए। शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि 5 सितंबर, शिक्षक दिवस से पहले उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर के अतिथि शिक्षक भोपाल में आंदोलन करेंगे। उन्होंने रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक तिरंगा यात्रा निकालकर सीएम हाउस के बाहर धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन करने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान “मरता अतिथि शिक्षक, तमाशा देखती सरकार”, “मोहन यादव होश में आओ” और “शिक्षा मंत्री होश में आओ” जैसे नारे लगाए गए।
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शाजापुर में अतिथि शिक्षकों ने निकाली अपनी ही 'अर्थी':सरकार से स्थायी नीति बनाने, समस्याओं के निराकरण की मांग
