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NEET Paper Leak Protest Chandigarh



सेक्टर-17 प्लाजा में प्रदर्शन करते छात्र।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे आंदोलन का असर अब चंडीगढ़ में भी दिखाई देने लगा है। शहर में एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर बड़े विरोध प्रदर्शन हुए।

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एक तरफ सेक्टर-17 प्लाजा में पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) और अन्य कॉलेजों के छात्र लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन करते रहे। वहीं, सेक्टर-25 में आम आदमी पार्टी (AAP) ने सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया। AAP ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया।

चंडीगढ़ के छात्र भी लगातार आवाज उठा रहे हैं। सेक्टर-17 प्लाजा में पंजाब यूनिवर्सिटी और शहर के अन्य कॉलेजों के छात्र संगठनों ने दूसरे दिन भी धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। प्लाजा में शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो, वी वांट जस्टिस और पेपर लीक बंद करो जैसे नारे लगाए गए।

छात्रों ने कहा-दमन की नीति अपना रही सरकार

प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ दमन की नीति अपना रही है। छात्रों का आरोप है कि बेरोजगारी, सस्ती और बेहतर शिक्षा तथा बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार की लाठियों और आंसू गैस से युवाओं की आवाज नहीं दबाई जा सकती। जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सेक्टर-25 में AAP ने सोनम वांगचुक के समर्थन में किया प्रदर्शन

दूसरी ओर, सेक्टर-25 में आम आदमी पार्टी की चंडीगढ़ इकाई ने सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया। पार्टी ने दिल्ली में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई की भी कड़ी निंदा की। प्रदर्शन का नेतृत्व AAP चंडीगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह ने किया। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

युवाओं और छात्रों पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण: विजयपाल

विजयपाल सिंह ने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे युवाओं और छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों और भविष्य के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई किसी भी लोकतांत्रिक देश में उचित नहीं है। सरकार को बल प्रयोग करने के बजाय युवाओं की जायज मांगें सुननी चाहिए।



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