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पंजाब भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ताजा मामले में एक जिला अध्यक्ष को नियुक्ति के महज 13 दिन बाद ही पद से हटा दिया गया, जिससे पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पद से हटाए गए जिला अध्यक्ष मनिंदर कप्याल ने कहा कि उन्हें हटाने का कारण पंजाब भाजपा अध्यक्ष या संगठन मंत्री श्री निवासलू ही बता सकते हैं। उनके अनुसार, जब उन्हें जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तब कार्यकर्ताओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में काफी उत्साह था। पिछले 12 दिनों में उन्होंने पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया, लेकिन उन्हें आज तक समझ नहीं आया कि आखिर उनकी गलती क्या थी। जानबूझकर संगठन में हाशिये पर धकेला जा रहा पूर्व जिला अध्यक्ष रणदीप सिंह देओल और भाजपा के वरिष्ठ प्रदेश नेता जितेंद्र कालरा ने कहा कि उनकी नाराजगी पार्टी हाईकमान से नहीं, बल्कि संगठन मंत्री के फैसलों को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम और किसान परिवारों से जुड़े कार्यकर्ताओं को जानबूझकर संगठन में हाशिये पर धकेला जा रहा है। जिला अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया जितेंद्र कालरा ने पार्टी के संविधान का हवाला देते हुए दावा किया कि किसी भी जिला अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसमें करीब दो महीने का समय लगता है। छह जिला अध्यक्षों को पद से हटा दिया उनका आरोप है कि संगठन मंत्री ने इस प्रक्रिया का पालन किए बिना पंजाब के छह जिला अध्यक्षों को पद से हटा दिया। नेताओं ने कहा कि वे इस मामले को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाएंगे और संगठन मंत्री के फैसलों के खिलाफ संघर्ष करेंगे।
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पंजाब BJP में 13 दिन में जिलाध्यक्ष पद से हटाए:कार्यकर्ताओं ने संगठन मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप; बहाली की मांग
