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ग्वालियर शहर की जर्जर व खस्ताहाल सड़कों को लेकर लगाई गई जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। सड़क निर्माण में धांधली और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगल पीठ ने नगर निगम प्रशासन को पांच अहम बिंदुओं पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट में बताया गया है कि शहर की 129 में से सिर्फ 62 सड़क की चलने लायक हैं। इसके अलावा अन्य सड़कों की हालत बेहद खराब है। कोर्ट ने नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता से नगर निगम द्वारा सड़क निर्माण पर पांच साल में कितना पैसा खर्च किया गया है यह ब्यौरा मांगा है। इसके साथ ही निर्माण के दौरान दर्ज की गई सड़कों की माप (मेज़रमेंट बुक्स) से जुड़े सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। एडवोकेट कमिश्नर व तकनीकी टीम करेगी सड़कों की खुदाई सड़कों की वास्तविक गुणवत्ता परखने के लिए हाईकोर्ट एक एडवोकेट कमिश्नर की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमीशन गठित करेगा। इस कमीशन के साथ एक तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी रहेगी, जो शहर की सड़कों की खुदाई कर यह वैज्ञानिक जांच करेगी कि निर्माण तय सरकारी मानकों के अनुसार हुआ था या कागजों में ही खेल किया गया। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया है कि जांच की कार्रवाई के दौरान नगर निगम का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहेगा। केवल निगम के अधिकृत वकील को ही उपस्थिति की अनुमति होगी। शहर की 50 फीसदी से ज्यादा सड़क खस्ताहाल यह पूरा मामला याचिकाकर्ता कैलाश चंद्र अग्रवाल द्वारा चेतकपुरी की बदहाल सड़क को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने बहस के दौरान बताया कि पूरे शहर की सड़कें चलने लायक नहीं बची हैं और आम जनता धूल व गड्डों से त्रस्त है। कोर्ट की सख्ती के बाद जब नगर निगम ने शहर की 129 प्रमुख सड़कों की स्थिति रिपोर्ट पेश की, तो प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट को देखते ही हाईकोर्ट ने दोपहर के भोजन के बाद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल कोर्ट में तलब कर लिया। सड़कों की वर्तमान हालत इस प्रकार है सीवर और एलिवेटेड रोड निर्माण ने बिगाड़े हालात सुनवाई के दौरान निगम के अधीक्षण यंत्री सुरेश अहिरवार ने शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया कि बहोड़ापुरा से सागरताल मेन रोड पर सीवर लाइन डालने के कारण सड़क टूटी है। वहीं छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत, रामकुई से भैंस मंडी पुल और तारागंज पुल से कमानी पुल तक एलिवेटेड रोड निर्माण कार्य के चलते यातायात प्रभावित हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ब्योरा केवल 129 मुख्य मार्गों का है, शहर की अंदरूनी गलियों और अन्य सड़कों की जानकारी संकलित की जा रही है। रिश्वत मामले में फंसे पूर्व सिटी प्लानर का भी रिकॉर्ड तलब मामले की सुनवाई के दौरान वर्तमान सिटी प्लानर ने कोर्ट को अवगत कराया कि पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था। वे फिलहाल निलंबित हैं और उनका मुख्यालय ग्वालियर नगर निगम ही है, जबकि उनका आपराधिक ट्रायल कोर्ट में लंबित है। इस जानकारी पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व सिटी प्लानर के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे की प्रमाणित प्रति (सर्टिफाइड कॉपी) भी पेश करने के कड़े आदेश जारी किए हैं।
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सड़कों को लेकर कोर्ट ने जताई नाराजगी:129 में से सिर्फ 62 सड़क चलने लायक, 24 सड़कें पूरी तरह बेकार, सड़क निर्माण का खर्च तलब किया
