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चंदौली कलेक्ट्रेट में विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर किसानों और अधिकारियों के बीच हुई बैठक का किसानों ने बहिष्कार कर दिया। किसानों ने परियोजना के उद्देश्य और मुआवजे की राशि सहित कई मुद्दों पर असहमति जताई। उन्होंने पहले एक बोर्ड गठित कर मामले को सुलझाने की मांग की, जिस पर अधिकारी सहमत नहीं हुए। किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकारी मनमाने ढंग से परियोजना को आगे बढ़ाना चाहते हैं और उन्हें डरा-धमकाकर पीछे धकेलने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी उपजाऊ भूमि इस परियोजना के लिए नहीं देंगे। किसान विद्या विनय शंकर सिंह ने बताया कि उन्हें विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना पर चर्चा के लिए अधिकारियों द्वारा आमंत्रित किया गया था। दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक के बावजूद अधिकारी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें अपनी जमीनें देने के बाद नौगढ़ के जंगलों में बसने का सुझाव दिया। किसानों ने बताया कि वे पहले भी यूपीडा और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक में यह मुद्दा उठा चुके हैं और लगातार सर्किल रेट के बजाय बाजार मूल्य पर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
किसानों ने अधिकारियों के सभी प्रस्तावों का सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि जनपद में पहले से ही हाईवे, रिंग रोड, ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे और भारतमाला जैसी कई परियोजनाएं मौजूद हैं, ऐसे में एक नई परियोजना को लाना उचित नहीं है। किसानों ने घोषणा की कि वे इस परियोजना का अंत तक विरोध करते रहेंगे। बैठक में अशोक सिंह, रामनारायण यादव, रविंद्र नाथ सिंह मुन्ना, रामजन्म मौर्य, विद्या विनय शंकर, पंकज यादव, नंदलाल यादव, बाबूलाल यादव और ध्रुव पांडेय सहित कई अन्य किसान उपस्थित थे।
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चंदौली में किसानों ने बैठक का बहिष्कार किया:विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना पर मुआवजा और भूमि अधिग्रहण पर असहमति
