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1010 किलो सोने-चांदी के सिंहासन पर विराजे बांके बिहारी:हरियाली तीज पर आज 8 लाख भक्त मथुरा पहुंचेंगे, हरे रंग के वस्त्र धारण किए भगवान




मथुरा में शनिवार को हरियाली तीज पर भक्तों की भीड़ है। वृंदावन में भगवान बांके बिहारी 10 किलो सोने और 1000 किलो चांदी से बने झूले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। उन्हें हरे रंग की बेशकीमती जड़ाऊ पोशाक और रत्नजड़ित सोने के आभूषण पहनाए गए हैं। प्रशासन का अनुमान है कि आज दिनभर 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु मथुरा आ सकते हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए बांके बिहारी मंदिर से 3 किलोमीटर पहले ही गाड़ियां रोकी जा रही हैं। वहां से ई-रिक्शा और ई-कार्ट की व्यवस्था की गई है। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा होने से बहुत लोगों को तीन किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंचना पड़ रहा है। शाम को दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में भगवान गोदा रंगमन्नार चांदी के झूले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज पर साल में एक बार झूला डाला जाता है। यहां भगवान बांके बिहारी गर्भगृह से निकलकर आंगन में लगे झूले में विराजमान होते हैं। भगवान बांके बिहारी पहली बार इस झूले में 19 अगस्त 1947 को विराजे थे। जबकि इस झूले को बनवाकर 15 अगस्त 1947 को भगवान को अर्पित किया था। 3 किमी पहले पार्किंग, यहां से पैदल मंदिर जाना पड़ रहा शहर में वाहनों की एंट्री के सभी रास्ते बंद कर ट्रैफिक का रूट बदला गया है। मंदिर से करीब 3 किमी दूर अलग-अलग एरिया में 21 से ज्यादा पार्किंग बनाई गई हैं। यहां बाहर से आने वाले वाहनों को रोक दिया जा रहा। इसके बाद वे ई-रिक्शा या ई-कार्ट बुक कर आ सकते हैं। किराया 20 रुपए प्रति यात्री तय है। ई-रिक्शा या ई-कार्ट न मिलने पर 3 किमी श्रद्धालुओं को पैदल चलना पड़ रहा। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि भीड़ जैसे ज्यादा बढ़ेगी, ई-रिक्शा और ई-कार्ट भी रोक दिए जाएंगे। मंदिर के आस-पास की सभी गलियों में बैरिकेडिंग लगाकर लाइन से मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है। वृंदावन को 4 जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। 1 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई है। भीड़ और यातायात व्यवस्था के लिए 69 बैरियर लगाए गए हैं। बांके बिहारी आज 4 घंटे ज्यादा दर्शन देंगे बांके बिहारी ने हरियाली पोशाक धारण की आज बांके बिहारी जी को हरे रंग की बेशकीमती जड़ाऊ पोषाक और रत्न जड़ित सोने के आभूषण धारण कराए गए हैं। इसके अलावा मावा, मलाई, मक्खन, सादा मीठा घेवर, फीकी, मीठी रसीली, केसरिया फैनी का विशेष भोग अर्पित किया जाना है। इस विशेष पर्व पर ठाकुरजी के विश्राम के लिए सोने-चांदी से बना शयन शैया सजाया गया है। जिसे सुख सेज कहा जाता है। भगवान बाल स्वरूप में होने के कारण ज्यादा देर तक खड़े रहने के चलते थक जाते हैं। उनको आराम देने के लिए यह सुख सेज लगाई जाती है। उसके पास चांदी का आइना सहित श्रृंगार की सभी सामग्री (सुहाग पिटारी) रखी गई है। भाव के अनुसार, झूला विहार के बाद बांके बिहारी जी इसी शैया पर शयन करते हैं, फिर उठकर सजते संवरते हैं। इसीलिए इस शयन शैया पर सुहाग पिटारी चढ़ाने का विशेष महत्व है। कब और कैसे झूला बनकर तैयार हुआ, इतिहास जानिए



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