शहर में अब सिर्फ नगर निगम के भरोसे स्वच्छता व्यवस्था नहीं चलेगी। घर से कचरा निकालने से लेकर उसके अंतिम निपटारे तक हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की तैयारी है। चंडीगढ़ नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बायलॉज-2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।
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इसमें सबसे अहम बदलाव यह है कि लोगों को कचरा घर या दुकान से निकलते समय ही अलग-अलग करना होगा। इसे सड़क, खाली प्लॉट, नाली या किसी जलस्रोत में फेंकना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ड्राफ्ट में अलग-अलग उल्लंघनों के लिए 500 रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
वहीं सार्वजनिक जगह पर कचरा फेंकने और खुले में कचरा जलाने पर बार-बार गलती करने वालों के लिए जुर्माना बढ़ता जाएगा। नगर निगम ने इस ड्राफ्ट पर शहरवासियों से 15 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

100 किलो से ज्यादा कचरा निकला तो खुद करनी होगी प्रोसेसिंग, जानें नियम:-
- सबसे पहले घर में बदलनी होगी कचरा रखने की आदत: नए नियमों के तहत कचरे को चार कैटेगरी में अलग रखना होगा। इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट शामिल हैं। यानी घर में रोजाना निकलने वाले सभी कचरे को एक ही पॉलीथिन या डस्टबिन में डालकर देना नियमों के मुताबिक नहीं होगा। अलग किया गया कचरा नगर निगम या अधिकृत कलेक्टर को सौंपना होगा। इसका मकसद यह है कि कचरे को बाद में अलग करने की जरूरत कम हो और रिसाइक्लिंग तथा प्रोसेसिंग का काम ज्यादा प्रभावी तरीके से हो सके।
- सड़क पर कचरा फेंका तो पहली गलती 500: सार्वजनिक जगह पर कचरा फेंकने वालों के लिए ड्राफ्ट में चरणबद्ध जुर्माने का प्रस्ताव है। पहली बार नियम तोड़ने पर 500 रुपए, दूसरी बार 1,000 रुपए और इसके बाद 2,000 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसमें सड़क, पार्क, बाजार और अन्य सार्वजनिक जगहों को साफ रखने पर खास जोर है। यानी घर का कचरा यह सोचकर सड़क किनारे या खाली प्लॉट में डालना कि बाद में सफाई कर्मचारी उठा लेंगे, अब भारी पड़ सकता है।
- खुले में कचरा जलाया तो 20 हजार तक जुर्माना: पत्तियां, प्लास्टिक या अन्य ठोस कचरा खुले में जलाने वालों पर भी सख्ती की गई है। पहली बार 5,000 रुपए, दूसरी बार 10,000 रुपए और इसके बाद 20,000 रुपए तक जुर्माने का प्रस्ताव है। इसका सीधा असर उन जगहों पर पड़ सकता है जहां सड़क किनारे, खाली प्लॉट या खुले मैदान में कचरा इकट्ठा कर जला दिया जाता है। स्वच्छता व्यवस्था को सिर्फ कचरे तक सीमित नहीं रखा गया है। उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार खुले में पेशाब और शौच जैसी गतिविधियों को ‘लिटरिंग’ यानी सार्वजनिक स्थान पर गंदगी फैलाने की श्रेणी में लाने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता बनाए रखना और ऐसी गतिविधियों पर नगर निगम को कार्रवाई का आधार देना है।
- नाली या पानी में कचरा डाला तो भी कार्रवाई: नए प्रावधानों का फोकस केवल सड़क पर कचरा फेंकने तक नहीं है। लोगों को नालियों, जलस्रोतों और सार्वजनिक स्थानों में कचरा डालने, उसे जलाने या दबाने से भी रोकने की व्यवस्था की गई है। इससे बरसात के दौरान नालियां जाम होने और कचरे के कारण जलस्रोतों के प्रदूषित होने की समस्या को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
- रोजाना 100 किलो से अधिक कचरा निकलता है: शहर की बड़ी हाउसिंग सोसायटी, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, संस्थान, बाजार और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से रोजाना 100 किलो से अधिक कचरा निकलता है तो उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे संस्थानों को अपने परिसर में गीले कचरे की कंपोस्टिंग या बायो-मेथनेशन के जरिए प्रोसेसिंग करनी होगी। साथ ही कचरे को स्रोत पर अलग करना, उसका रिकॉर्ड रखना और निगम को मासिक रिटर्न देना भी जरूरी होगा।
- बड़े आयोजनों में भी कचरा संभालने की जिम्मेदारी: 100 से अधिक लोगों वाले कार्यक्रमों के आयोजकों की भी जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान है। ऐसे आयोजनों में कचरे को शुरुआत से ही अलग रखने और उसके उचित निपटारे की व्यवस्था करनी होगी। यानी शादी, धार्मिक कार्यक्रम, सामुदायिक आयोजन या अन्य बड़े कार्यक्रम के बाद सड़क, पार्क या आसपास के क्षेत्र में कचरा छोड़ देना आयोजकों के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकता है। बड़ी सोसायटी और मार्केट एसोसिएशन को भी संभालना होगा अपना कचरा
- बायो-मेथनेशन के जरिए प्रोसेस करने की व्यवस्था: 5,000 वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र वाली गेटेड कम्युनिटी और संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन, होटल और रेस्टोरेंट के लिए भी स्रोत पर कचरा अलग करने और अलग-अलग कलेक्शन की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। रिसाइक्लेबल कचरे को अधिकृत रिसाइक्लर या वेस्ट पिकर्स तक पहुंचाने और जैविक कचरे को जहां संभव हो, वहीं कंपोस्टिंग या बायो-मेथनेशन के जरिए प्रोसेस करने की व्यवस्था करनी होगी।

सिर्फ जनता की नहीं, नगर निगम की भी जिम्मेदारी
नए सिस्टम में नगर निगम की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। निगम को डोर-टू-डोर सेग्रीगेटेड वेस्ट कलेक्शन, कचरा हॉटस्पॉट की पहचान, पर्याप्त डस्टबिन, नियमित स्ट्रीट स्वीपिंग और नालियों व जलस्रोतों में कचरा जाने से रोकने की व्यवस्था करनी होगी। यानी व्यवस्था का पूरा मॉडल यह होगा कि नागरिक कचरा अलग करके दें। निगम उसे उसी तरीके से उठाकर प्रोसेसिंग और निपटारे तक पहुंचाए।
10 लाख रुपए तक जुर्माना, लेकिन हर गलती पर इतना नहीं
ड्राफ्ट में गंभीर उल्लंघनों के लिए 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य तौर पर कचरा फेंकने पर हर व्यक्ति से 10 लाख रुपए वसूले जाएंगे। जुर्माने की राशि उल्लंघन की प्रकृति और लागू प्रावधान के अनुसार तय होगी। सार्वजनिक जगह कचरा फेंकने और खुले में कचरा जलाने के लिए ऊपर बताए गए अलग-अलग चरणों वाले जुर्माने प्रस्तावित हैं।
अब 15 दिन में शहरवासी दे सकते हैं अपनी राय
नगर निगम ने ड्राफ्ट पर लोगों और संबंधित पक्षों से 15 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सुझाव swmbylawsmcc@gmail.com पर ई-मेल किए जा सकते हैं या एमओएच कार्यालय में जमा करवाए जा सकते हैं। ड्राफ्ट निगम की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।अभी ये प्रस्तावित बायलॉज हैं। सुझाव और आपत्तियां मिलने के बाद निगम इन्हें अंतिम रूप देगा। इसलिए अंतिम नियम लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस उल्लंघन पर कौन-सा दंड किस तरीके से लगाया जाएगा।
