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अंतराष्ट्रीय मुक्केबाज मैरीकॉम के कोच रहे वाराणसी के पहाड़ी गांव के रहने वाले छोटेलाल को द्रोणाचार्य अवार्ड मिलेगा। इस बता की सूचना मिलते साथ ही पूरे वाराणसी में और खेल जगत में हर्ष का माहौल है। छोटेलाल 12 साल की उम्र से खुद बॉक्सिंग कर रहे हैं और साल 2005 में उन्होंने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। छोटेलाल सेना में हवलदार पद पर तैनात हैं। उन्होंने साल 2015 से मैरीकॉम को प्रशिक्षण देना शुरू किया था। इसके अलावा छोटेलाल की ही देखरेख और प्रशिक्षण में हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में जैस्मिन, साक्षी और अरुंधति ने गोल्डन पंच लगाया। इन्हे साल 2022 से छोटेलाल प्रशिक्षण दे रहे हैं। मिलेगा देश का सबसे बड़ा प्रशिक्षक सम्मान वाराणसी के पहाड़ी गांव स्थित कंदवा इलाके में रहने वाले छोटेलाल यादव 12 साल की उम्र से बॉक्सिंग कर रहे हैं। साईं ने साल 1999 में 200 खिलाड़ियों का चयन किया था। जिसमें वाराणसी के छोटेलाल यादव भी थे। छोटेलाल ने यहां से प्रशिक्षण पाने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2005 एशियन गेम्स में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीत लिया। जिसके बाद उन्हें सेना में हवलदार के पद पर जॉब मिल गई। अब सरकार ने उन्हें देश का सबसे बड़ा प्रशिक्षक सम्मान द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित करने का एलान किया है। 2015 से मैरीकॉम के मुख्य प्रशिक्षक छोटेलाल को ओलिंपिक गोल्ड क्वेस्ट (OGQ) के तहत मैरीकॉम के निजी प्रशिक्षक के रूप में साल 2015 में साइन किया गया। सेना से इसके लिए अनुमति मिलने के बाद मेरीकॉम के साथ काम करना शुरू किया। जिसके बाद मैरीकॉम ने 6 स्वर्ण पदक और दो कांस्य पदक जीते। इसमें ओलिंपिक में आठवां कांस्य पदक भी शामिल है।
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मैरीकॉम के कोच वाराणसी के छोटेलाल को द्रोणाचार्य अवार्ड:कॉमनवेल्थ के मुक्केबाजों को दिया प्रशिक्षण, खुद 12 साल की उम्र से खेल रहे
