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‘दिमागी नक्सलवाद’ पर केदार कश्यप का कांग्रेस पर हमला:बोले- पीएम के बयान पर भ्रम फैलाया जा रहा, नक्सल समर्थकों में बेचैनी है




‘दिमागी नक्सलवाद’ को लेकर कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी पर वन मंत्री केदार कश्यप ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं या उनके लोकतांत्रिक आंदोलनों को नक्सलवाद से नहीं जोड़ा है। बल्कि नक्सली हिंसा को वैचारिक समर्थन देने वाली मानसिकता पर चिंता जताई है। कांग्रेस प्रधानमंत्री के बयान को तोड़-मरोड़कर युवाओं के नाम पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद खत्म हो रहा है, इसलिए उसके समर्थकों की बेचैनी भी सामने आ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बरसात का अवसर है तो मेंढक के टर्राने से कौन रोक सकता है। राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक नक्सल समर्थक किस तरह चिल्ला रहे हैं, यह पूरा देश देख रहा है।” कांग्रेस की नीतियों पर भी उठाए सवाल वन मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता नक्सलियों को अपना रोल मॉडल तक मानते रहे हैं और अब वही लोग नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने योगदान की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीतियों, नरमी और मिलीभगत के कारण नक्सलवाद को वर्षों तक विस्तार का अवसर मिला। चिदंबरम से पूछा- निर्णायक लड़ाई क्यों नहीं लड़ी? कश्यप ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज चिदंबरम खुद को ‘दिमागी नक्सली’ बता रहे हैं, लेकिन देश उनसे जानना चाहता है कि जब आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके हाथों में थी, तब नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई क्यों नहीं लड़ी गई। उन्होंने कहा कि चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ लगातार नक्सली हिंसा से जूझता रहा। सवाल सीधा है कि जब देश की आंतरिक सुरक्षा की कमान उनके हाथों में थी, तब नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार क्यों नहीं हुआ। कांग्रेस से चिदंबरम के बयान पर स्थिति साफ करने को कहा कश्यप ने कहा कि नक्सली हिंसा और उसकी विचारधारा के प्रति सहानुभूति या नरमी रखने वाली सोच नक्सलवाद को वैचारिक ताकत देती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ कांग्रेस से भी अपनी चुप्पी तोड़ने और स्पष्ट करने को कहा कि वह पी. चिदंबरम के बयान के साथ खड़ी है या नहीं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद जैसे गंभीर विषय पर कांग्रेस का दोहरा चरित्र और सुविधानुसार राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती। ‘बस्तर का युवा अब शांति और विकास चाहता है’ वन मंत्री ने कहा कि बस्तर का युवा नक्सलवाद के साथ नहीं है। बस्तर का युवा अब शांति, शिक्षा, रोजगार और विकास चाहता है। कांग्रेस को युवाओं की आड़ में नक्सली विचारधारा के समर्थकों का बचाव करना बंद करना चाहिए।



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