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राजधानी में शातिर साइबर ठगों ने खुद को एटीएस, एनआईए और पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताकर 60 वर्षीय एक शिक्षक को तीन दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और 18 लाख रुपए की ठगी कर ली। आरोपियों ने बुजुर्ग शिक्षक पर मानसिक दबाव बनाकर इस वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित की शिकायत पर रेंज साइबर पुलिस थाने में बुधवार देर रात मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मनी लॉन्ड्रिंग और वारंट का दिखाया खौफ ठगों ने शिक्षक से संपर्क कर दावा किया कि उनके पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर में एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए हो रहा है। इसके साथ ही लखनऊ एटीएस से उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर उन्हें डराया गया। इसके बाद वर्दी पहने एक शख्स ने वीडियो कॉल कर खुद को अधिकारी बताया और जांच का हवाला देकर शिक्षक को घर में ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ रहने के निर्देश दिए। जांच के नाम पर ली जानकारी, तुड़वाई एफडी तीन दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दौरान आरोपियों ने किसी से भी संपर्क करने पर सख्त पाबंदी लगा दी। इस दौरान ठगों ने शिक्षक के परिवार, बैंक बैलेंस और कुल संपत्ति से जुड़ी हर बारीक जानकारी हासिल कर ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें आरबीआई की ओर से ‘नॉन-इन्वॉल्वमेंट सर्टिफिकेट’ दिया जाएगा। फर्जी जांच से घबराकर शिक्षक ने अपनी बैंक एफडी तुड़वाई और ठगों द्वारा दिए गए खाते में 18 लाख रुपए आरटीजीएस कर दिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। साइबर रेंज ने शुरू की जांच पीड़ित की शिकायत पर रायपुर साइबर रेंज के अधिकारियों ने मामलें में केस दर्ज करके जांच शुरु कर दी है। पीड़ित ने जिस अकाउंट में पैसा ट्रांसफर किया, उसका डिटेल अफसरों द्वारा खंगाला जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है, कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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रायपुर में शिक्षक को डिजिटल अरेस्ट करके ठगे 18 लाख:मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाया, 3 दिन तक वीडियो कॉल पर निगरानी की; ATS -NIA अफसर बनकर ट्रांसफर कराए पैसे
