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चंडीगढ़ से हैदराबाद भेजे जाएंगे DRDO वैज्ञानिक:कैट ने याचिका खारिज की, DRDO के 21 वैज्ञानिकों के तबादले को प्रशासनिक जरूरत बताया




चंडीगढ़ में करीब 17 साल से तैनात डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक ललित प्रसाद को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की चंडीगढ़ बेंच से झटका लगा है। कैट ने उनके चंडीगढ़ से हैदराबाद तबादले के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। ललित प्रसाद डीआरडीओ की टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल), चंडीगढ़ में तैनात थे। दिसंबर 2025 में डीआरडीओ ने उनका तबादला हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) में कर दिया था। वैज्ञानिक ने तबादले के आदेश के साथ उन्हें रिलीव करने के निर्देश को भी कैट में चुनौती दी थी। उन्होंने लंबे समय से चंडीगढ़ में तैनाती, अपनी तकनीकी विशेषज्ञता, बच्चों की पढ़ाई और पत्नी की नौकरी समेत पारिवारिक व अन्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए तबादला रद्द करने की मांग की थी। हालांकि कैट ने इन दलीलों को तबादला रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। वैज्ञानिकों की तैनाती तय करने का अधिकार कैट ने मामले की सुनवाई के दौरान माना कि किसी वैज्ञानिक को किस प्रयोगशाला में तैनात करना है और उपलब्ध वैज्ञानिक संसाधनों का किस तरह बेहतर इस्तेमाल किया जाना है, यह तय करना डीआरडीओ के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकार क्षेत्र में आता है। डीआरडीओ ने कैट को बताया था कि वैज्ञानिकों का तबादला किसी एक कर्मचारी को ध्यान में रखकर नहीं किया गया था। मिसाइल एंड स्ट्रैटेजिक सिस्टम क्लस्टर की प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिकों की जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को देखते हुए कुल 21 वैज्ञानिकों के तबादले का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसी आधार पर ललित प्रसाद का भी तबादला किया गया। कैट ने डीआरडीओ की इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रशासनिक जरूरत और वैज्ञानिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए किए गए तबादले में सामान्य तौर पर न्यायिक हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित होती है। इसके बाद वैज्ञानिक की याचिका खारिज कर दी गई। 2008 में वैज्ञानिक ‘डी’ के तौर पर भर्ती ललित प्रसाद ने अपनी याचिका में बताया था कि वह वर्ष 2008 में डीआरडीओ में वैज्ञानिक ‘डी’ के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक टीबीआरएल, चंडीगढ़ में काम किया। करीब 17 साल की सेवा के दौरान उन्होंने विस्फोटक वारहेड के डिजाइन, विकास, असेंबली, परीक्षण और मूल्यांकन से जुड़े काम में विशेषज्ञता हासिल की। अक्टूबर 2017 से वह टीबीआरएल के योजना एवं समन्वय प्रभाग में काम कर रहे थे। उनके अनुसार इस दौरान वह राष्ट्रीय और रणनीतिक महत्व की कई परियोजनाओं से जुड़े रहे। उनका कहना था कि लंबे समय में उन्होंने चंडीगढ़ की प्रयोगशाला में विशेष तकनीकी विशेषज्ञता विकसित की है, इसलिए उनका तबादला उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप नहीं है। टीबीआरएल-आरसीआई के काम अलग होने तर्क वैज्ञानिक ने कैट के सामने यह भी तर्क दिया कि चंडीगढ़ स्थित टीबीआरएल और हैदराबाद स्थित आरसीआई के कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं। टीबीआरएल में मुख्य रूप से टर्मिनल बैलिस्टिक्स, विस्फोटक सामग्री, वारहेड डिजाइन और उनके परीक्षण से जुड़े कार्य होते हैं। वहीं, आरसीआई में मुख्य रूप से मिसाइल प्रणालियों, निर्देशित हथियारों, एवियोनिक्स और नेविगेशन से संबंधित तकनीकी कार्य किए जाते हैं। ऐसे में उनका कहना था कि उनकी विशेषज्ञता टीबीआरएल के काम से अधिक जुड़ी हुई है और इसी कारण उन्हें आरसीआई भेजना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि तबादले के कारण उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों पर असर पड़ेगा। पत्नी की नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का हवाला ललित प्रसाद ने अपनी याचिका में बताया कि उनकी पत्नी हरियाणा सरकार में नौकरी करती हैं। ऐसे में हैदराबाद तबादला होने पर परिवार को चंडीगढ़ क्षेत्र से दूर जाना पड़ेगा। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका भी जताई थी। वैज्ञानिक ने इन परिस्थितियों को देखते हुए डीआरडीओ से तबादला रद्द करने की मांग की थी। लेकिन कैट ने माना कि पारिवारिक परिस्थितियां अपने आप में प्रशासनिक तबादले को रद्द करने का आधार नहीं बनतीं, खासकर जब विभाग ने तबादले के पीछे प्रशासनिक और तकनीकी जरूरत बताई हो। डीआरडीओ ने कैट में बताया कि मिसाइल एंड स्ट्रैटेजिक सिस्टम क्लस्टर के तहत आने वाली प्रयोगशालाओं के प्रदर्शन और वैज्ञानिक संसाधनों की मई 2025 में समीक्षा की गई थी। समीक्षा के बाद अधिकारियों के बीच वैज्ञानिकों की जरूरत और उपलब्ध मानव संसाधन को लेकर चर्चा हुई। इसी प्रक्रिया के बाद 21 वैज्ञानिकों के तबादले का प्रस्ताव तैयार किया गया। प्रस्ताव को रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष ने 5 दिसंबर 2025 को मंजूरी दी थी। इसके बाद संबंधित वैज्ञानिकों के तबादले के आदेश जारी किए गए। टीबीआरएल-आरसीआई एक ही क्लस्टर का हिस्सा डीआरडीओ ने कैट को यह भी बताया कि टीबीआरएल और आरसीआई दोनों मिसाइल एंड स्ट्रैटेजिक सिस्टम क्लस्टर का हिस्सा हैं। दोनों प्रयोगशालाओं के बीच कई तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग होता है। ऐसे में किसी वैज्ञानिक को एक प्रयोगशाला से दूसरी प्रयोगशाला में भेजना विभाग की प्रशासनिक और तकनीकी जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। डीआरडीओ का कहना था कि वैज्ञानिकों की तैनाती केवल उनकी वर्तमान प्रयोगशाला में किए जा रहे काम के आधार पर नहीं होती, बल्कि पूरे क्लस्टर की जरूरत, विशेषज्ञता और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर की जाती है। दिसंबर 2025 में हुआ था तबादला ललित प्रसाद का तबादला दिसंबर 2025 में टीबीआरएल, चंडीगढ़ से आरसीआई, हैदराबाद किया गया था। इसके बाद उन्हें रिलीव करने के आदेश भी जारी किए गए। वैज्ञानिक ने इन आदेशों को कैट में चुनौती दी और तबादला रद्द करने की मांग की। कैट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डीआरडीओ के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस तरह ललित प्रसाद का हैदराबाद तबादला बरकरार रहा और उनकी याचिका खारिज हो गई।



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