Headlines

पंजाब में BJP को बचाने के लिए रैली:संगठन मंत्री पर मनमानी का आरोप, संगरूर में पूर्व अध्यक्षों ने किया प्रदर्शन




पंजाब में पैर जमाने की कोशिशों में जुटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। पंजाब भाजपा को आंतरिक गुटबाजी से बचाने के उद्देश्य से संगरूर में एक विशेष रैली और विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस रैली के दौरान पार्टी के भीतर चल रहे गहरे विवाद और मतभेद पूरी तरह सार्वजनिक हो गए। प्रदर्शनकारी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पंजाब भाजपा के संगठन मंत्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर उनके फैसलों को कटघरे में खड़ा किया है। जिला संगरूर-1 की कमान को लेकर उठा बड़ा विवाद प्रदर्शनकारियों और वरिष्ठ स्थानीय नेताओं का आरोप है कि पंजाब भाजपा के संगठन मंत्री के तानाशाही और मनमाने फैसलों के कारण जिला संगरूर-1 की अध्यक्षता को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नेताओं ने हैरान करने वाला दावा करते हुए कहा कि जमीन पर काम करने वाले एक सक्रिय नेता को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया, लेकिन उनकी नियुक्ति के मात्र 13 दिन बाद ही उन्हें बिना किसी ठोस कारण के अचानक पद से हटा दिया गया। इस फैसले से जिले के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। संगठन मंत्री के कामकाज और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के कई पूर्व जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं ने संगठन मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे में पार्टी के भीतर लिए जा रहे संगठनात्मक निर्णयों में पारदर्शिता (Transparency) का घोर अभाव है। पूर्व जिला अध्यक्षों ने संयुक्त रूप से कहा कि बंद कमरों में फैसले लेकर जमीनी स्तर पर दिन-रात काम करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं की भावनाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे पंजाब में भाजपा की स्थिति मजबूत होने के बजाय कमजोर हो रही है। अनुशासनहीनता के नोटिस के बाद और भड़का आक्रोश सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद तब और बढ़ गया जब हाल ही में पंजाब भाजपा आलाकमान ने संगठन के फैसलों पर आपत्ति जताने वाले इन स्थानीय नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए थे। पार्टी द्वारा की गई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई से बैकफुट पर आने के बजाय पूर्व जिला अध्यक्षों और उनके समर्थकों का गुस्सा और भड़क गया। उन्होंने अपनी ही पार्टी के संगठन मंत्री के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन करने का रास्ता चुना। भाजपा का आंतरिक संकट एक बार फिर सार्वजनिक संगरूर में हुई इस विरोध रैली ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहाँ पार्टी पंजाब में अपना आधार बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनों के ही खिलाफ पूर्व जिला अध्यक्षों के इस तीखे विद्रोह ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है। अब देखना यह होगा कि पंजाब भाजपा का शीर्ष नेतृत्व संगरूर के इस सुलगते विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *