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EPFO PF Account Scam; FAKE Website Cyber Fraud Cases


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4 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) उनकी सबसे महत्वपूर्ण सेविंग है। ये सेविंग रिटायरमेंट के बाद और क्राइसिस के समय काम आती है। PF बैलेंस चेक करने, क्लेम सेटलमेंट करने या पेंशन से जुड़ी जानकारी के लिए करोड़ों लोग ‘एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन’ (EPFO) की ऑनलाइन सर्विसेस यूज करते हैं।

देश में EPFO के करीब 8 करोड़ एक्टिव मेंबर्स हैं। ऐसे में साइबर ठगों की नजर अब PF खातों पर भी पड़ गई है। वे EPFO के नाम पर फर्जी मैसेज भेजकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए EPFO ने अपने मेंबर्स के लिए एडवाइजरी जारी की है।

इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में EPFO से जुड़े स्कैम की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • साइबर ठग EPF अकाउंट को क्यों निशाना बना रहे हैं?
  • EPF अकाउंट को कैसे सिक्योर रखें?

एक्सपर्ट- राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- EPF अकाउंट क्या है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • यह एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसे ‘एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन’ (EPFO) संचालित करता है।
  • इसमें एम्प्लॉई और एम्प्लॉयर हर महीने तय राशि जमा करते हैं। इस जमा रकम पर ब्याज मिलता है।
  • इसे रिटायरमेंट के समय या EPF के नियमों के तहत कुछ खास परिस्थितियों में निकाला जा सकता है।
  • EPF अकाउंट को UAN से जोड़ा जाता है, जो एम्प्लॉई के PF अकाउंट की पहचान के लिए जरूरी होता है।

सवाल- EPFO ने अपनी एडवाइजरी में क्या कहा है?

जवाब- EPFO ने अपने मेंबर्स को ऑनलाइन सतर्क रहने की सलाह दी है। एडवाइजरी में इन बातों का ध्यान रखने को कहा गया है-

  • अनजान SMS, ईमेल, वॉट्सएप मैसेज या सोशल मीडिया लिंक पर भरोसा न करें।
  • किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें।
  • वेबसाइट का URL ध्यान से चेक करें।
  • UAN, पासवर्ड, आधार, पैन और बैंक डिटेल जैसी जानकारी शेयर न करें।
  • किसी के साथ OTP शेयर न करें।

सवाल- UAN क्या है और इसे सुरक्षित रखना क्यों जरूरी है?

जवाब- UAN यानी ‘यूनिवर्सल अकाउंट नंबर’ EPFO की ओर से दिया जाने वाला 12 अंकों का स्थायी नंबर है। नौकरी बदलने पर भी यही नंबर PF अकाउंट की पहचान बना रहता है। इसे सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि साइबर ठग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

सवाल- साइबर ठग EPF अकाउंट को क्यों निशाना बना रहे हैं?

जवाब- EPF अकाउंट में लंबे समय से जमा रकम और एम्प्लॉई की पर्सनल व बैंकिंग डिटेल्स जुड़ी होती हैं। स्कैमर्स के निशाने पर दो ही चीजें हैं–

  • आपका पैसा
  • आपकी जानकारी

वे EPF अकाउंट को इसलिए निशाना बना सकते हैं ताकि पैसा और जानकारी चुरा सकें।

सवाल- ठग EPFO के नाम पर स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं?

जवाब- साइबर ठग सबसे पहले EPFO के नाम पर लोगों को भरोसे में लेते हैं। इसके बाद ठगी को अंजाम देने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं, जैसेकि–

  • UAN और अकाउंट से जुड़ी जानकारी चुराते हैं।
  • फर्जी KYC या PF क्लेम के नाम पर जानकारी मांगते हैं।
  • बैंक डिटेल और OTP मांगते हैं।
  • PF की रकम निकालने या ट्रांसफर कराने का झांसा देते हैं।

आइए, अब इन पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं-

1. वॉट्सएप लिंक स्कैम

  • ठग PF क्लेम, KYC या अकाउंट अपडेट के नाम पर वॉट्सएप लिंक भेजते हैं।
  • जब यूजर लिंक पर क्लिक करता है तो उससे UAN, बैंक डिटेल, OTP मांगी जाती है।
  • जानकारी शेयर करने पर उसके साथ ठगी हो सकती है।

2. फर्जी कॉल से फ्रॉड

  • ठग EPFO अधिकारी बनकर फोन करते हैं।
  • वे यूजर को भरोसे में लेकर UAN, बैंक डिटेल और OTP मांगते हैं।

3. KYC अपडेट का झांसा

  • ठग कॉल या मैसेज से KYC अपडेट के नाम पर लोगों को झांसे में लेते हैं।
  • वे PF अकाउंट बंद होने और क्लेम रुकने का डर दिखाते हैं।
  • आधार, पैन, बैंक डिटेल या OTP लेकर फ्रॉड करते हैं।

4. फेक वेबसाइट स्कैम

  • ठग EPFO जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजकर लॉगिन करवाते हैं।
  • UAN और पासवर्ड जैसी सेंसिटिव डिटेल्स से स्कैम को अंजाम देते हैं।

5. ईमेल फिशिंग

  • ठग EPFO के नाम से फर्जी ईमेल भेजकर PF क्लेम या KYC का झांसा देते हैं।
  • यूजर इस पर क्लिक करके लॉगिन डिटेल्स डालता है।
  • ठग इसके जरिए फ्राॅड या ब्लैकमेलिंग करते हैं।

सवाल- कैसे पहचानें कि EPFO की वेबसाइट का लिंक फेक है?

जवाब- फर्जी लिंक में अक्सर वेबसाइट की स्पेलिंग में बदलाव, अजीब डोमेन या अतिरिक्त शब्द होते हैं। ग्राफिक में फर्जी लिंक पहचानने के आसान तरीके देखिए-

सवाल- EPFO की असली वेबसाइट को कैसे पहचानें?

जवाब- इसके लिए सबसे पहले वेबसाइट का आधिकारिक एड्रेस देखें। EPFO की आधिकारिक वेबसाइट और पोर्टल ये हैं-

  • https://www.epfindia.gov.in
  • https://www.epfo.gov.in
  • https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/memberinterface/

आधिकारिक वेबसाइट की पहचान

  • वेबसाइट का डोमेन .gov.in होता है।
  • URL की शुरुआत https:// से होती है।
  • एड्रेस बार में पैड लॉक का निशान होता है।
  • वेबसाइट के नाम और स्पेलिंग में कोई गलती नहीं होती है।

सवाल- EPFO के नाम पर आया फर्जी कॉल या मैसेज कैसे पहचानें?

जवाब- किसी भी कॉल या मैसेज में अगर तुरंत कार्रवाई का दबाव हो तो सतर्क हो जाएं। नीचे ग्राफिक में फर्जी कॉल और मैसेज के संकेत देखिए-

सवाल- EPFO कौन-से काम करने के लिए कभी नहीं कहता?

जवाब- EPFO गाइडलाइन के मुताबिक, ऑर्गेनाइजेशन कभी भी फोन कॉल, मैसेज, वॉट्सएप, सोशल मीडिया या ईमेल के जरिए कोई सेंसिटिव डिटेल्स नहीं मांगता। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अपने EPF अकाउंट को कैसे सिक्योर करें?

जवाब- इसके लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

सवाल- EPF अकाउंट का KYC कंप्लीट करने की सही प्रक्रिया क्या है?

जवाब- EPFO के अनुसार इसकी प्रक्रिया इस तरह है-

  • सबसे पहले EPFO के आधिकारिक मेंबर पोर्टल पर UAN से लॉगिन करें।
  • इसके बाद ‘मैनेज’ सेक्शन में ‘KYC’ विकल्प चुनें।
  • जरूरत के अनुसार आधार, PAN और बैंक अकाउंट की जानकारी दर्ज करें।
  • जानकारी भरने के बाद ‘सेव’ करें।
  • डिटेल्स ‘KYC पेंडिंग फॉर अप्रूवल’ में दिखाई देती है।
  • अप्रूवल के बाद स्टेटस ‘डिजिटली अप्रूव्ड बाय एम्प्लॉयर’ दिखता है।

सवाल- मजबूत पासवर्ड कैसा होना चाहिए?

जवाब- मजबूत पासवर्ड ऐसा होना चाहिए, जिसका आसानी से अनुमान न लगाया जा सके। इसमें बड़े और छोटे अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर का मिश्रण हो, जैसेकि-

  • कम-से-कम 12 कैरेक्टर का पासवर्ड रखें।
  • नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल न करें।
  • बड़े-छोटे अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर मिलाएं।
  • हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखें।
  • पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें।

सवाल- अगर गलती से फर्जी लिंक पर क्लिक हो गया तो क्या करें?

जवाब- ऐसे में घबराएं नहीं। तुरंत ये कदम उठाएं-

  • फर्जी वेबसाइट को तुरंत बंद करें।
  • UAN या पासवर्ड दर्ज किया है तो तुरंत पासवर्ड बदलें।
  • बैंक डिटेल शेयर की है तो बैंक को तुरंत सूचना दें।
  • किसी अनजान एप या फाइल को डाउनलोड किया है तो उसे डिलीट करें।

सवाल- साइबर फ्रॉड होने पर कहां शिकायत करें?

जवाब- ऐसे में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत कर सकते हैं। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, उतना ही एक्शन के चांस होंगे। शिकायत के लिए फ्रॉड से जुड़े सबूत सुरक्षित रखें।

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