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जरूरत की खबर- क्या आपको पान मसाले-गुटखे की लत है:इससे बढ़ता मुंह, गले के कैंसर का रिस्क, डॉक्टर से जानें लत छोड़ने के 7 तरीके




हाल ही में महाराष्ट्र ‘फूड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (FDA) ने अभिनेता अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन को लेकर नोटिस भेजा है। FDA का मानना है कि यह पान मसाला के अप्रत्यक्ष प्रचार यानी सरोगेट विज्ञापन का मामला है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर पान मसाला और उसके हेल्थ रिस्क पर बहस छेड़ दी है। कुछ लोग यह मानते हैं कि बिना तंबाकू वाला पान मसाला सेफ होता है। जबकि साइंटिफिक स्टडीज में इसमें मौजूद सुपारी से भी कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बताया गया है। साल 2024, में ‘द लैंसेट ऑन्कोलॉजी’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पान मसाला के मुख्य कंपोनेंट सुपारी से ओरल कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में पान मसाला के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. जे. बी. शर्मा, डायरेक्टर, ऑन्कोलॉजिस्ट, एक्शन कैंसर हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- पान मसाला और गुटखा क्या है? क्या ये दोनों एक ही हैं? जवाब- ये दोनों सुपारी से बने प्रोडक्ट हैं, जिन्हें लोग चबाकर खाते हैं। दोनों में सबसे बड़ा अंतर तंबाकू का होता है। गुटखा में तंबाकू मिला होता है, जबकि पान मसाला में आमतौर पर तंबाकू नहीं होता। हालांकि तंबाकू न होने का मतलब यह नहीं है कि पान मसाला पूरी तरह सेफ है। इसमें मौजूद सुपारी भी हेल्थ के लिए खतरनाक है। लंबे समय तक इसके सेवन से कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है। सवाल- अगर पान मसाला में निकोटिन नहीं है तो फिर उसका विज्ञापन करना गलत क्यों है? जवाब- सिर्फ निकोटिन न होना किसी प्रोडक्ट को पूरी तरह सेफ नहीं बनाता। पान मसाला के विज्ञापनों पर आपत्ति की एक बड़ी वजह सरोगेट एडवर्टाइजिंग है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पान मसाला में कौन-से इंग्रीडिएंट होते हैं? इनका शरीर पर क्या असर होता है? जवाब- पान मसाला कई चीजों को मिलाकर बनाया जाता है। इसके प्रमुख इंग्रीडिएंट्स में सुपारी, कत्था, चूना, इलायची, सौंफ, फ्लेवरिंग एजेंट्स, स्वीटनर शामिल होते हैं। अलग-अलग ब्रांड्स में इनकी मात्रा अलग हो सकती है। पॉइंटर्स से इसके शरीर पर पड़ने वाले असर को समझिए- सुपारी चूना कत्था फ्लेवर और स्वीटनर इलायची, सौंफ और सुगंधित पदार्थ सवाल- रेगुलर पान मसाला खाने से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है? जवाब- इससे कई बीमारियों का रिस्क बढ़ता है, जैसेकि- OSMF और ल्यूकोप्लाकिया जैसी स्थितियां प्री-कैंसरस हैं। यानी समय रहते इलाज न होने पर ये कैंसर में बदल सकती हैं। यही वजह है कि लंबे समय तक पान मसाला खाने से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में कैंसर का रिस्क भी बढ़ता है। ग्राफिक में सभी रिस्क देखिए- सवाल- गुटखा-पान मसाला कैसे कैंसर का कारण बनता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- कैंसर होने पर मुंह में कौन-से शुरुआती संकेत दिख सकते हैं? जवाब- शुरुआती फेज में अक्सर छोटे-छोटे बदलाव दिखते हैं। लेकिन लोग इन्हें सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर ये लक्षण 2-3 हफ्ते तक बने रहें या बार-बार दिखाई दें तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- क्या रोज एकाध पाउच खाना भी खतरनाक है? जवाब- हां, जोखिम सिर्फ मात्रा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह भी मायने रखता है कि पान मसाला कितने समय से खाया जा रहा है। अगर इसे रोजाना खाया जाए, तो लंबे समय में मुंह की बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है। सवाल- पान मसाला छोड़ना मुश्किल क्यों होता है। लोग चाहकर भी क्यों नहीं छोड़ पाते? जवाब- इसमें मौजूद सुपारी ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम को प्रभावित करती है। इससे ब्रेन में ऐसे केमिकल्स रिलीज होते हैं, जो अच्छा महसूस कराते हैं। ब्रेन इस एहसास का आदी हो जाता है। यही वजह है कि पान मसाला छोड़ने पर कई लोगों को इसकी तलब, बेचैनी या चिड़चिड़ापन महसूस होता है। सवाल- पान मसाले की लत छोड़ने के लिए क्या करें? जवाब- इसके लिए ट्रिगर्स को पहचानना सबसे जरूरी है। साथ ही कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- अगर कोई आज गुटखा-पान मसाला खाना छोड़ता है तो अगले दो सालों में उसकी सेहत में क्या बदलाव दिखेंगे? जवाब- शुरुआत में तलब और चिड़चिड़ापन हो सकता है, लेकिन कुछ हफ्तों और महीनों में मुंह, दांत और सेहत में सुधार शुरू हो जाता है। ग्राफिक में देखिए, सेहत में क्या बदलाव होते हैं- पान मसाला की एक पुड़िया खाने में कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन लंबे समय में इसका शरीर पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए सेहत को प्राथमिकता दें और आज ही गुटखा-पान मसाला छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाएं। आखिरकार, शरीर वही याद रखता है, जिसे हम बार-बार दोहराते हैं। अच्छी आदतें सेहत बनाती हैं और बुरी आदतें धीरे-धीरे उसे नुकसान पहुंचाती हैं। ************ ग्राफिक्स- अंकुर बंसल ………………………. ये खबर भी पढ़ें…
जरूरत की खबर- ब्लड टेस्ट करवाने जा रहे हैं:जानें टेस्ट से पहले क्या करें, क्या नहीं, मामूली गलती से भी बदल सकती है रिपोर्ट बीमारी को पहचानने और उसका इलाज करने का मुख्य आधार है- ब्लड टेस्ट। लेकिन अगर टेस्ट से पहले सही तैयारी न की जाए, तो रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट प्रभावित होने से इलाज भी प्रभावित हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…



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