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चंडीगढ़ पुलिस ने कामरा-वांगचुक पर FIR से किया इनकार:कहा-दिल्ली पुलिस को भेजी जाए शिकायत; देवी-देवताओं पर विवादित टिप्पणी से जुड़ा मामला




कॉमेडियन कुणाल कामरा, शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में FIR दर्ज करने की मांग पर चंडीगढ़ पुलिस ने कार्रवाई से इनकार कर दिया है। पुलिस ने चंडीगढ़ जिला अदालत में दाखिल अपने जवाब में कहा कि शिकायत में जिस कथित घटना का जिक्र किया गया है वह दिल्ली में हुई थी। इसलिए मामले की जांच का अधिकार दिल्ली पुलिस के पास है। चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत से शिकायत को दिल्ली पुलिस के पास भेजने की सिफारिश की है। मामले में हाईकोर्ट के 2 वकीलों विभु सैनी और मोहित जसुजा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत जिला अदालत में याचिका दायर कर तीनों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने मांगी थी स्टेटस रिपोर्ट याचिका पर सुनवाई करते हुए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अंबिका शर्मा की अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस को नोटिस जारी कर मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि 15 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान कुणाल कामरा ने मंच से हिंदू धर्म और देवी-देवताओं को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक बयान दिया था। उनका कहना था कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शिकायत में सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके को भी आरोपी बनाने की मांग की गई थी। प्रदर्शन का नेतृत्व करने का लगाया आरोप याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। दोनों ने कुणाल को कथित आपत्तिजनक बयान देने से नहीं रोका। याचिकाकर्ताओं के अनुसार प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कुणाल कामरा का कथित बयान वाला वीडियो इंटरनेट मीडिया पर भी प्रसारित हुआ था। इसके आधार पर उन्होंने तीनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। पहले SSP फिर थाना 3 पुलिस को दी शिकायत याचिकाकर्ताओं ने मामले में पहले चंडीगढ़ के SSP और सेक्टर-3 थाना पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने जिला अदालत का रुख किया। अब चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत में दाखिल जवाब में क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए कहा कि कथित घटना दिल्ली में हुई थी। इसलिए मामले की जांच और कार्रवाई दिल्ली पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आती है। पुलिस ने शिकायत को दिल्ली पुलिस के पास भेजने की सिफारिश की है। BNS की धारा 299-302 के तहत कार्रवाई की मांग शिकायतकर्ताओं ने अपनी याचिका में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 302 के तहत कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के अनुसार, धारा 299 धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने और धर्म का अपमान करने से संबंधित है, जबकि धारा 302 धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शब्द, संकेत या वस्तु से संबंधित है।



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