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हिमाचल कैंटोनमेंट क्षेत्रों में नए बायलॉज पर एसोसिएशन की आपत्ति:रक्षा मंत्रालय को लिखा लेटर, एक्साइजेशन पर फैसला होने तक इन्हें लागू न करने की मांग




हिमाचल प्रदेश कैंटोनमेंट एसोसिएशन ने प्रदेश के छह कैंटोनमेंट क्षेत्रों में नए बिल्डिंग बायलॉज लागू करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने रक्षा मंत्रालय और कैंटोनमेंट बोर्डों के सीईओ को एक पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि जब कैंटोनमेंट के सिविल क्षेत्रों को स्थानीय निकायों में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, तो नए भवन नियम लागू करना सही नहीं है। कैंटोनमेंट एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि सिविल क्षेत्रों को पड़ोसी स्थानीय निकायों में शामिल किया जाएगा। इन क्षेत्रों में नगर निकायों के कानून लागू होंगे। ऐसे में, एक्साइजेशन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले कैंटोनमेंट के लोगों पर अलग से नए भवन नियम लागू करना ठीक नहीं है। पुराने भवन और वास्तु नियमों को बदलने का प्रावधान प्रस्तावित ड्राफ्ट बायलॉज में कैंटोनमेंट क्षेत्रों के पुराने भवन और वास्तु नियमों को बदलने का प्रावधान है। हिमाचल के कुछ कैंटोनमेंट में ये नियम कई दशक पुराने हैं। उदाहरण के लिए, सुबाथू में 16 अक्टूबर 1933 और डलहौजी में 28 जून 1932 से जुड़े भवन नियम लागू हैं। नए ड्राफ्ट में जोनिंग, फ्लोर एरिया, ग्राउंड कवरेज, भवन की ऊंचाई, सेटबैक, संरचनात्मक सुरक्षा और निर्माण मानकों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने नए बिल्डिंग बायलॉज पर लोगों से 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। छह कैंटोनमेंट के लिए अलग-अलग ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किए गए हैं, क्योंकि हर क्षेत्र में मौजूदा भवन नियम अलग हैं। यहां देखें लेटर की कॉपी… स्थानीय निकायों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी करने की मांग कैंटोनमेंट एसोसिएशन के महासचिव मनमोहन शर्मा ने कहा कि एसोसिएशन की मुख्य मांग है कि पहले सिविल एरिया को राज्य सरकार या संबंधित स्थानीय निकायों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि अगर सिविल क्षेत्र स्थानीय निकायों में शामिल होते हैं और वहां के नगरपालिका कानूनों के तहत आते हैं, तो कैंटोनमेंट के लिए अलग बिल्डिंग बायलॉज का कोई मतलब नहीं रह जाता। शर्मा ने यह भी कहा कि लोग कैंटोनमेंट व्यवस्था से पूरी तरह मुक्त होना चाहते हैं। चार साल से लंबित है सिविल एरिया ट्रांसफर एसोसिएशन के अनुसार कैंटोनमेंट के सिविल क्षेत्रों को राज्य सरकार और आसपास के स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया करीब चार साल से चल रही है, लेकिन अभी तक इसका अंतिम समाधान नहीं हुआ है। कैंटोनमेंट एसोसिएशन ने मांग की है कि पहले लंबित प्रक्रिया पर फैसला लिया जाए और उसके बाद ही नए बिल्डिंग बायलॉज को लेकर आगे बढ़ा जाए।



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