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कानपुर में रविवार शाम को भगवान गणेश की बारात निकलने से पहले जलकल विभाग की खोदाई के काम का लोगों ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि काम पूरा होने के बाद कर्मचारियों ने गड्ढे को मिट्टी से भर दिया था, लेकिन बाद में हुई बारिश से यहां कीचड़ हो गया। जिससे बप्पा की बारात में शामिल कई भक्त फिसलकर गिरते और बचते रहे। वार्ड-6 के भन्नानापुरवा स्थित झकरकटी चौराहे पर आशा माता मंदिर है, यहां हर साल गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार भी आयोनज चल रहा है। क्षेत्र के रहने वाले संत मिश्र और अन्य लोगों ने बताया कि रविवार दोपहर जलकल जोन-3 के कर्मचारी मंदिर के पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि टाटमिल के पास पीने के पानी की पाइपलाइन फट गई है, जिससे पानी बर्बाद हो रहा है। लाइन का वाल्व मंदिर के बाहर लगा होने के कारण उसे बंद करने के लिए खोदाई जरूरी बताई गई। बारात निकलने से पहले खोदाई का विरोध किया था स्थानीय लोगों और मंदिर कमेटी ने शाम को निकलने वाली गणेश बारात का हवाला देते हुए कर्मचारियों से खोदाई रोकने को कहा। आरोप है कि इसके बावजूद कर्मचारियों ने जेसीबी से खोदाई जारी रखी। वाल्व बंद करने के बाद गड्ढे को मिट्टी से भर दिया गया। इसके बाद अचानक हुई बारिश ने मिट्टी को कीचड़ में बदल दिया, जिससे रात में बप्पा की बारात के दौरान भक्त फिसलकर गिरने लगे। इससे परेशान कमेटी के सदस्यों ने कीचड़ वाली जगह पर मेज पलटकर रख दी, जिससे श्रद्धालुओं को वहां से निकलने में कुछ सहूलियत हुई। जलकल का दावा- रोलर से कराया था समतलीकरण जलकल जोन-3 के अवर अभियंता मनु ने बताया कि टाटमिल पर पेयजल लाइन फटने के कारण मंदिर के बाहर लगा वाल्व बंद करना जरूरी था। उन्होंने बताया कि मंदिर प्रबंधन की रजामंदी और अन्य विभागों से बातचीत के बाद ही खोदाई कराई गई। करीब एक घंटे में काम पूरा हो गया था। इसके बाद गड्ढा पाटकर रोलर से जगह को समतल भी कराया गया था।
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गणेश बारात के रास्ते में जलकल ने खोदा गड्ढा:भन्नानापुरवा में लोगों ने जताया विरोध, बारिश के बाद कीचड़ में बदला रास्ता
