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कुरावली में गूंजे जिनेंद्रभक्ति के स्वर, संस्मरणों से श्रद्धालुओं भावुक:भजनों पर झूमे श्रद्धालु, विद्यासागर महाराज के वैराग्य प्रसंगों ने छू लिया मन




मैनपुरी के कुरावली में दसलक्षण महापर्व के पांचवें दिन रविवार रात श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भक्ति और धार्मिक उत्साह का माहौल रहा। मंगल आरती में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने मंगल दीपों से जिनेंद्र भगवान की आराधना की। मुरैना मध्यप्रदेश से आए निलेश जैन एंड म्यूजिकल ग्रुप ने जैन भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु झूमते और भक्ति नृत्य करते नजर आए। इसके बाद स्वाध्याय भवन में श्री ब्राह्मी विद्या आश्रम जबलपुर से आईं बाल ब्रह्मचारी चंद्रप्रभा दीदी और संध्या दीदी ने प्रवचन दिए। उन्होंने दसलक्षण धर्म के पांचवें लक्षण उत्तम शौच धर्म का महत्व समझाया। दीदी ने कहा कि शौच का मतलब सिर्फ बाहरी सफाई नहीं है, बल्कि मन को लोभ, तृष्णा और संग्रह की भावना से साफ करना भी है। जब मन इच्छाओं और लोभ से आजाद होता है, तभी अंदर की शुद्धता का रास्ता खुलता है। संध्या दीदी ने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के जीवन से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। उन्होंने उनके वैराग्य, त्याग, तप और समाज के प्रति समर्पण की घटनाओं का जिक्र किया। दीदी ने बताया कि आचार्य गुरुवर ने पूरे जैन समाज को जो दिशा और संस्कार दिए, उनका उपकार कभी चुकाया नहीं जा सकता। उनके जीवन का हर प्रसंग साधना, संयम और आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है। इन संस्मरणों को सुनकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए।

इसके बाद मंच पर धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता हुई। अरिहंत टीम में आरोही जैन और ज्योति जैन, सिद्ध टीम में साधना जैन और राखी जैन, आचार्य टीम में सोनम जैन और सारिका जैन, और उपाध्याय टीम में नीलम जैन और सांची जैन शामिल थीं। प्रतियोगिता में आचार्य टीम की सोनम जैन और सारिका जैन पहले स्थान पर रहीं। अरिहंत टीम दूसरे, सिद्ध टीम तीसरे और उपाध्याय टीम चौथे स्थान पर रही। विजेताओं को जैन समाज कुरावली कार्यकारिणी ने इनाम दिए। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में राजेश जैन बंटू और डॉ. प्रदीप जैन रहे। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री अभिषेक जैन और ज्ञायक जैन ने किया। इस दौरान अध्यक्ष मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष अखिल जैन, कुलदीप जैन, अजय जैन, राजीव जैन, अनुज जैन, अंकित जैन, अमन जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि धार्मिक प्रतियोगिताओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कारों से जोड़ना है। दसलक्षण महापर्व के दौरान लगातार दस दिनों तक इसी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन किए जाएंगे।



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