सतना में गणेश उत्सव के समापन पर शुक्रवार को गणपति बप्पा की विदाई धूमधाम से हुई। सुबह से रुक-रुककर हो रही बारिश भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं कर सकी।
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दोपहर होते ही शहर के अलग-अलग इलाकों से गणेश प्रतिमाएं विसर्जन के लिए निकलने लगीं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों में सजाकर प्रतिमाएं ले जाई गईं।
रास्तों में ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। जगह-जगह ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे गूंजते रहे।
शहर में प्रतिमा विसर्जन के लिए माधवगढ़, जिगनहट, सतना नदी के उचवां टोला और ट्रांसपोर्ट नगर तालाब में इंतजाम किए गए थे। माधवगढ़ रपटा विसर्जन का मुख्य केंद्र बना रहा, जहां सबसे ज्यादा प्रतिमाएं पहुंचीं।

शाम तक सभी विसर्जन स्थलों पर करीब 200 से ज्यादा छोटी-बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका था। प्रतिमाओं के पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहने की संभावना है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विसर्जन स्थलों पर शाम के बाद पर्याप्त रोशनी का इंतजाम किया गया था।
बड़ी प्रतिमाओं को नदी में सुरक्षित उतारने के लिए प्रशासन ने क्रेन भी लगाई थी। भीड़ को काबू करने के लिए विसर्जन स्थलों पर बैरिकेडिंग भी की गई।

सुरक्षा को देखते हुए नदी में फ्लोटिंग वॉल लगाई गई, ताकि श्रद्धालु गहरे पानी तक न पहुंच सकें। सभी विसर्जन स्थलों पर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल तैनात था।
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की विशेष टीम और मोटर बोट भी नदी किनारे तैयार रखी गई थीं।
बारिश के बीच भी बप्पा की विदाई में उमड़ा उत्साह शहर की सड़कों पर देर रात तक दिखा। विसर्जन के साथ ही दस दिवसीय गणेश उत्सव का समापन हुआ और श्रद्धालुओं ने अगले बरस बप्पा के फिर आने की कामना के साथ उन्हें विदाई दी।
