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तीन साल से जिस पिता के लौटने का इंतजार था, सामने आते ही बेटियां उनसे लिपटकर रो पड़ीं। पिता भी बेटियों और बेटे को सामने देखकर अपने आंसू नहीं रोक सके। यह मिलन भरतपुर के अपना घर आश्रम में हुआ, जहां तीन साल से परिवार से दूर रह रहे रामबाबू को उनके परिजनों से मिलाया गया। बेटे और बेटियों के साथ बहू भी उन्हें लेने पहुंची। परिवार से मिलकर रामबाबू अपने घर के लिए रवाना हो गए। इलाज के लिए घर से निकले, फिर नहीं लौटे
अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया कि रामबाबू(70) करीब तीन साल पहले अपने गांव जलालपुर से इलाज कराने अलीगढ़ गए थे। इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटे। परिवार ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने अलीगढ़(उत्तर प्रदेश) पुलिस में उनकी गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई थी। रामबाबू के बेटे राजू ने भी पिता की तलाश में हर संभव कोशिश की, लेकिन वह नहीं मिले। 2023 में आश्रम पहुंचाए गए थे रामबाबू
15 जून 2023 को रामबाबू को भरतपुर की अटलबंद थाना पुलिस ने हीरादास इलाके से रेस्क्यू किया था और उन्हें अपना घर आश्रम पहुंचाया। आश्रम में उनका इलाज और देखभाल की गई। धीरे-धीरे तबीयत में सुधार हुआ तो रामबाबू ने आश्रम प्रबंधन को अपने परिवार और गांव के बारे में जानकारी दी। रामबाबू की जानकारी के आधार पर आश्रम प्रबंधन ने परिवार से संपर्क करने की कोशिश शुरू की। काफी प्रयास के बाद परिजनों से संपर्क हो गया। पिता के जिंदा होने की खबर मिलते ही बेटियां सुशीला और शीतल, बेटा राजू और उसकी पत्नी रिकेश अपना घर आश्रम पहुंच गए। परिवार को सामने देखते ही रामबाबू बेटियों से लिपटकर रो पड़े। बेटियों की आंखों से भी आंसू छलक उठे। बेटे राजू ने पिता को गले लगा लिया, जबकि बहू रिकेश ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। तीन साल बाद परिवार से मिले रामबाबू इसके बाद अपने बेटे और परिवार के साथ घर के लिए रवाना हो गए।
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3 साल बाद पिता से मिली बेटियां, लिपटकर फूट-फूटकर रोये:हॉस्पिटल में इलाज करवाने निकले थे, फिर नहीं लौटे
