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गुड़ामालानी में बनकर तैयार बाजरा अनुसंधान केंद्र:कल होगा उद्घाटन,  साइंटिस्ट बताएंगे मिलेट्स के फायदे




बालोतरा जिले के गुड़ामालानी में तीन साल पहले बाजरा अनुसंधान केंद्र की नीव रखी गई थी। अब यह सेंटर बनकर तैयार हो गया। 27 सितंबर यानी रविवार को केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट इसका उद्घाटन करेंगे। वहीं वैज्ञानिकों ने रिसर्च भी शुरू कर दी है। केन्द्र के प्रमुख और परियोजना समन्वयक डॉ. एस. एन. सक्सेना ने बताया कि इस भवन का शिलान्यास 27 सितंबर 2023 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति के जरिए किया गया था, जो ठीक 3 वर्षों की अवधि में बनकर पूरी तरह तैयार हो गया है। सक्सेना ने कहा- हमारी नई बिल्डिंग पूरी तरीके से तैयार हो गई है। इसमें सब सुविधाएं है जैसे- लेबोरेट्री, फॉर्मा एरिया तैयार हो गया है और अब बाजरे की रिसर्च गुड़ामालानी में भी कर सकते हैं जो कि जलवायु की दृष्टि से बाजरे के लिए सबसे उपयुक्त है क्योंकि सबसे ज्यादा बाजरा राजस्थान में होता है। आने वाले समय में यहां पर वैश्चिक स्तर पर बाजरे का अनुसंधान किया जाएगा। किसान खुद करेंगे हाईब्रिड फसलों का सिलेक्शन हमारी वैज्ञानिक टीम तैयार हो चुकी है। फिलहाल 5 साइंटिस्ट हमारे साथ में है। हमने एक हजार से ज्यादा किसानों को आमंत्रित किया है। इनको बताएंगे कि इस रिसर्च से किस तरीके से फायदा ले सकेंगे। कई तरह की हाईब्रिट्स जो पूरे देश में बाजरे की पैदावर हुई थी। उनको भी यहां पर लगाया गया है। किसान आएंगे और सिलेक्ट कर सकेंगे कि यह हाईब्रिड हमारे लिए उपयोगी है या नहीं। एक ही जगह पर होगा बाजरे का रिसर्च अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना के पूरे देश में 13 सेंटर थे। देशभर की रिसर्च जोधपुर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में हैड क्वार्टर में होती थी। बाजरे की सभी अनुसंधान को एक जगह इकट्‌ठा करने के लिए आईसीआर ने जो लोकेशन जोधपुर में थी उसको अब यहां पर स्थापित किया गया है। देश में बाजरा अनुसंधान का मुख्य केंद्र बना गुडामालानी बाजरा अनुसंधान परियोजना का राष्ट्रीय मुख्यालय जोधपुर से गुडामालानी स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके बाद अब गुडामालानी देश में बाजरा अनुसंधान का सबसे प्रमुख केंद्र बन गया है। नए परिसर से सूखा-सहिष्णु (ड्राउट-रेजिस्टेंट) किस्मों, नई संकर (हाइब्रिड) किस्मों के विकास, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और शुष्क क्षेत्रों के लिए फसल प्रबंधन पर अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी। इसका सीधा लाभ बाड़मेर, बालोतरा, जालोर और आसपास के जिलों के किसानों को मिलेगा। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण और गतिविधियां बाजरा की उन्नत, संकर किस्मों और कम पानी वाले क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन की तकनीकों पर किसान और वैज्ञानिकों के बीच सीधी चर्चा होगी। कृषि प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। ICAR के कई संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य विभागों, बीज कंपनियों और कृषि-उद्यमियों के जरिए प्रदर्शनी स्टॉल लगाए जाएंगे। क्षेत्र के उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा। पश्चिमी राजस्थान के लोगों को फायदा मिलेगा क्षेत्रीय बाजरा अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.एन. सक्सेना ने बताया- क्षेत्रीय बाजरा अनुसंधान केंद्र के शुरू होने से पश्चिमी राजस्थान में श्रीअन्न (बाजरा) के उत्पादन और वैल्यू एडिशन को नए आयाम मिलेंगे। बाड़मेर, बालोतरा, जालोर सहित आसपास के सभी किसान अधिक से अधिक संख्या में किसान मेले में पहुंचकर वैज्ञानिकों से उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त करें। ये दिग्गज भी होंगे शामिल कार्यक्रम में बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी, गुडामालानी विधायक और राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री के. के. बिश्नोई, ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव और भारतीय श्रीअन्न अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ. सी. तारा सत्यवती विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इनपुट : रमेश गौड़



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