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देवघर- 3 महीने में सांप काटने के 60-70 मामले:औसतन हर डेढ़ दिन में एक केस, चार की मौत, 250 से अधिक सांपों का हुआ रेस्क्यू




देवघर जिले में जुलाई से सितंबर के बीच करीब 60 से 70 लोग सर्पदंश के शिकार हुए। तीन माह यानी करीब 92 दिनों के इस आंकड़े के हिसाब से औसतन हर डेढ़ दिन में एक व्यक्ति को सांप ने डंसा। इस दौरान सर्पदंश से चार लोगों की मौत की भी जानकारी है। सदर अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, बारिश के इन तीन महीनों में सर्पदंश के मामले सामने आए हैं। वहीं, सांपों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग की विशेष रेस्क्यू टीम ने पिछले दो महीनों में 250 से अधिक सांपों को सुरक्षित पकड़ा है। इनमें कई जहरीले सांप भी शामिल हैं। रेस्क्यू के बाद सांपों को सुरक्षित प्राकृतिक स्थानों पर छोड़ दिया गया है। रेस्क्यू टीम को मिले हैं उपकरण और गाड़ियां देवघर जिले में बारिश के दौरान सांपों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने विशेष रेस्क्यू टीम गठित की है। विभाग के अनुसार, पिछले दो महीनों में टीम ने 250 से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है। बारिश के दौरान बिलों में पानी भरने के बाद सांपों के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आ रही हैं। घरों के आंगन, बगीचे, रसोई और अन्य हिस्सों से सांप मिलने की सूचना पर टीम को भेजा जा रहा है। सांप पकड़ने में दक्ष राजीव रंजन के अनुसार वन विभाग ने रेस्क्यू टीम को आवश्यक उपकरण और दो वाहन उपलब्ध कराए हैं। जिला वन पदाधिकारी अभिषेक भूषण ने बताया कि सांप मिलने की सूचना के बाद रेस्क्यू टीम को आधे घंटे के भीतर मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है। आम लोग 112 पर भी सांप मिलने की सूचना दे सकते हैं। जुलाई से सितंबर के बीच 60-70 सर्पदंश के मामले सांपों के रेस्क्यू के साथ जिले में सर्पदंश के मामले भी सामने आए हैं। सदर अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच करीब 60 से 70 सर्पदंश के मामले सामने आए हैं। इस दौरान चार लोगों की मौत की जानकारी है। हाल ही में मधुपुर में सर्पदंश के बाद एक व्यक्ति की सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत की भी रिपोर्ट सामने आयी थी। मोहनपुर के चक्रमा पंचायत की मुखिया के सर्पदंश का मामला भी सामने आया था। परिजनों के झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने और बाद में अस्पताल पहुंचने की बात सामने आयी। एम्स के सहयोग से चल रहे सर्पमित्र कार्यक्रम के परियोजना प्रबंधक बीरेंद्र कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद कई लोग अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक पर भरोसा करते हैं, जिससे इलाज में देरी होती है। सिविल सर्जन डॉ. एसपी मिश्रा ने लोगों से सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है। कोबरा, करैत और रसेल वाइपर का रेस्क्यू वन विभाग के अनुसार बारिश के दौरान रिहायशी इलाकों में करैत, कोबरा और रसेल वाइपर जैसे जहरीले सांपों के अलावा अजगर और चूहा सांप भी मिल रहे हैं। रेस्क्यू टीम को सांप पकड़ने के लिए आवश्यक उपकरण और वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग की ओर से लोगों से सांप दिखने पर उसे खुद पकड़ने या मारने के बजाय रेस्क्यू टीम को सूचना देने की अपील की गई है। 112 पर सूचना देने की सुविधा भी उपलब्ध है। झाड़-फूंक नहीं, इलाज कराएं वहीं सर्पदंश की स्थिति में तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है, जहां चिकित्सकीय उपचार और एंटी-वेनम उपलब्ध कराया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता अभियान में भी लोगों को सर्पदंश के बाद बिना देरी अस्पताल पहुंचने और झाड़-फूंक से बचने की जानकारी दी जा रही है।



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