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जयपुर समेत पूरे राजस्थान में मनाया ‘नो UPI डे':व्यापारियों ने UPI पर MDR शुल्क के विरोध में किया प्रदर्शन, बोले- प्रस्तावित MDR शुल्क वापस ले सरकार




भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर शुक्रवार को जयपुर समेत पूरे राजस्थान में व्यापारियों ने ‘नो UPI डे’ मनाया। व्यापारियों ने UPI से होने वाले ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का विरोध किया और 15 अक्टूबर से प्रस्तावित MDR शुल्क वापस लेने की मांग की। जयपुर में गांधीनगर सर्किल पर व्यापारी इकट्ठा हुए और महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर UPI पर शुल्क लगाने के विरोध में प्रदर्शन किया।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि UPI पर प्रस्तावित 0.4% MDR शुल्क को लेकर देशभर के व्यापारियों में विरोध है। अलग-अलग राज्यों के व्यापारिक संगठनों से बातचीत हुई है और सभी ने इस शुल्क का विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापारियों पर यह शुल्क नहीं लगाना चाहिए और 15 अक्टूबर से लागू होने वाले शुल्क को वापस लेना चाहिए। गांधी जयंती पर व्यापारियों ने जताया विरोध
बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि आज पूरे देश में व्यापारी ‘नो UPI डे’ मना रहे हैं। जयपुर में भी व्यापारियों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर गांधी जयंती मनाई और इसके साथ UPI पर प्रस्तावित शुल्क का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की मांग है कि सरकार इस शुल्क को वापस ले।
बोले- व्यापारियों पर बढ़ेगा खर्च
गुप्ता ने कहा कि UPI के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शन पर MDR शुल्क लगाने से व्यापारियों पर अतिरिक्त खर्च आएगा। उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल अब छोटे से लेकर बड़े कारोबार तक में हो रहा है। ऐसे में UPI पर शुल्क लगने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री से प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग की। जयपुर व्यापार महासंघ समेत कई संगठन रहे मौजूद
गांधीनगर सर्किल पर हुए कार्यक्रम में जयपुर व्यापार महासंघ के महामंत्री सुरेश सैनी समेत कई व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और व्यापारी मौजूद रहे। व्यापारियों ने UPI पर प्रस्तावित MDR शुल्क के खिलाफ अपनी बात रखी और सरकार से शुल्क वापस लेने की मांग की।
15 अक्टूबर से प्रस्तावित है शुल्क
व्यापारी संगठन UPI पर प्रस्तावित 0.4% MDR शुल्क का विरोध कर रहे हैं। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का कहना है कि अगर शुल्क वापस नहीं लिया गया तो 15 अक्टूबर से इसे लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन का कहना है कि देशभर के व्यापारिक संगठनों से इस मुद्दे पर बातचीत की गई है और विरोध जारी रखने का फैसला किया गया है।



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