Headlines

पेट्रोल पंप-गन लाइसेंस के नाम पर ₹36 लाख ठगे:सोनीपत में मुख्य आरोपी की दूसरी याचिका खारिज, गवाहों को धमकाने की आशंका पर कोर्ट सख्त




सोनीपत में पेट्रोल पंप लगवाने, शस्त्र लाइसेंस बनवाने, नौकरी दिलाने और कनाडा भेजने के नाम पर करीब 35 से 36 लाख रुपए की ठगी के मामले में मुख्य आरोपी हरीश को सोनीपत कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सोनीपत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सिंह की कोर्ट ने आरोपी की दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने आरोपी के हत्या के मामले में पहले से सजायाफ्ता होने, ठगी के मामले में उसकी भूमिका और मुख्य गवाहों की गवाही बाकी होने को महत्वपूर्ण माना। अभियोजन पक्ष ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को डरा-धमका सकता है और मुकदमे की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। आरोपी की ओर से सह-आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिलने का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत मांगी गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। सिविल लाइन थाने में दर्ज है ठगी का मामला यह मामला सोनीपत के सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। आरोपी हरीश गांव टांडा, तहसील राई, सोनीपत का निवासी है। मामले में शिकायतकर्ता प्रह्लाद ने आरोप लगाया था कि उसे पेट्रोल पंप लगवाने, शस्त्र लाइसेंस बनवाने और नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम ली गई। मुख्य आरोपी रोहित से हरीश ने कराई थी मुलाकात शिकायत के अनुसार, हरीश ने ही प्रह्लाद की मुलाकात गुरुग्राम निवासी रोहित से कराई थी। इसके बाद केएमपी रोड पर झज्जर के पास पेट्रोल पंप लगवाने, गन लाइसेंस और नौकरी दिलाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 12 लाख रुपए लिए गए। इसके अलावा, प्रह्लाद के साले राहुल से कनाडा भेजने के नाम पर 4.50 लाख रुपए लेने का आरोप है। शिकायत में अन्य परिचितों से भी ठगी किए जाने की बात कही गई है। कुल ठगी की रकम करीब 35 से 36 लाख रुपए बताई गई है। आरोपी के वकील ने दी सह-आरोपियों को जमानत मिलने की दलील 9 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता मामन सिंह ने दलील दी कि हरीश को झूठा फंसाया गया है और उससे कोई बरामदगी नहीं हुई है। आरोपी 15 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है और पुलिस चालान भी पेश कर चुकी है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले के सह-आरोपी रोहित कुमार और राहुल को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के सिद्धांत के आधार पर हरीश को भी जमानत दी जानी चाहिए। हत्या के मामले में सजायाफ्ता होने का दिया गया हवाला राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक मीना ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि हरीश की भूमिका मामले में महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसी ने शिकायतकर्ता को सह-आरोपी से मिलवाया था। अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी राई थाने में दर्ज हत्या के मामले में पहले से सजायाफ्ता है। अभियोजन ने दलील दी कि आरोपी का आपराधिक इतिहास और मौजूदा मामले में उसकी भूमिका जमानत देने के पक्ष में नहीं है। 27 में से केवल दो गवाहों की हुई गवाही अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में कुल 27 गवाह हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान अब तक केवल दो गवाहों की गवाही हुई है। शिकायतकर्ता सहित प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने, डराने-धमकाने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है। कोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय इस पहलू को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने दूसरी नियमित जमानत याचिका की खारिज दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सिंह ने आरोपी हरीश की दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले में आरोपी की भूमिका, उसके आपराधिक इतिहास और मुख्य गवाहों की गवाही बाकी होने जैसे पहलुओं पर विचार किया। सह-आरोपियों को जमानत मिलने के आधार पर हरीश को समान राहत देने की दलील स्वीकार नहीं की गई। इस फैसले के बाद आरोपी को इस याचिका के आधार पर जमानत नहीं मिली।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *