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हिमाचल किसान सभा के 17वें राज्य सम्मेलन की शुरुआत मंगलवार को एक विशाल महारैली के साथ हुई। 13 और 14 अक्टूबर को किसान मजदूर भवन, चाटी में आयोजित इस सम्मेलन में प्रदेशभर के किसानों, बागवानों और मजदूरों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई और सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई गई। सम्मेलन को अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, राज्य महासचिव राकेश सिंघा और राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने संबोधित किया। वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग उपेक्षा का शिकार हो रहा है। सम्मेलन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे बढ़ती लागत और स्थिर आय: खेती-किसानी की बढ़ती लागत और इसके मुकाबले किसानों की आय में स्थिरता न होने पर गहरी चिंता जताई गई। व्यापार समझौते: अमेरिका और न्यूजीलैंड के साथ हुए व्यापार समझौतों से स्थानीय कृषि व बागवानी पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों का विरोध किया गया। महंगाई का मार: खाद्य वस्तुओं, चीनी, रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों से आम जनजीवन प्रभावित होने की बात कही गई। मनरेगा और ग्रामीण रोजगार: मनरेगा का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ करने के कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों पर पड़े नकारात्मक असर का मुद्दा उठाया गया। दूध उत्पादकों की समस्याएं: दूध उत्पादकों को उनके उत्पाद का समय पर भुगतान न मिलने की समस्या को प्रमुखता से रखा गया। स्मार्ट मीटर और निजीकरण: बिजली के क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध करते हुए इसे बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में एक कदम बताया गया।
परियोजना प्रभावितों की मांगें किसान सभा ने मांग की कि विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को एक प्रतिशत रॉयल्टी दी जाए। इसके अलावा धूल से फसलों को होने वाले नुकसान और घरों में आई दरारों के लिए उचित मुआवजा, एकमुश्त राहत राशि तथा प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।
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रामपुर में किसान सभा की महारैली, सरकार पर साधा निशाना:राज्य सम्मेलन में डॉ. अशोक धवले और राकेश सिंघा ने उठाए किसानों के मुद्दे
