परविंदर सिंह झोटा को सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे लोग।
मानसा में मंगलवार सुबह एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा (45) की मेडिकल स्टोर संचालक ने गोली मारकर हत्या कर दी। उन्हें 3 गोलियां मारी गई। इसके अलावा उनके 4 साथियों को भी गोली लगी है। बेटे की मौत के बाद मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
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परविंदर सिंह की मां बेटे के शव के पास रोती-बिलखती नजर आईं। उन्होंने कहा-
मेरा बेटा मुझे कहता था, ‘मां, ये मुझे मार देंगे।’ घर से निकलने से पहले उसने मेरे पैर छुए और कहा- ‘मां, मेरा खाना तैयार रखना।’ उन्होंने मेरा अनमोल बेटा छीन लिया। सरकार ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।

पिता भीमसेन ने कहा कि यह बात सब लोगों को पता है कि यह बंदा अरबों-खरबों रुपए के आगे भी झुकने और बिकने वाला नहीं है। न मेरा बेटा बिका था और न ही मैं कभी बिकूंगा। अगर कोई सोचता है कि हमें डराकर या पैसे के दम पर दबा दिया जाएगा, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है।

परविंदर सिंह झोटा की मां रोते हुए।
परमिंदर की मां ने ये बातें कही…
- मां ने रोते हुए कहा कि परमिंदर सिंह झोटा लोगों के बच्चों और बेटियों को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए प्रयास कर रहा था। वह नशे के खिलाफ आवाज उठाता था और युवाओं का भविष्य बचाना चाहता था।
- मां ने आरोप लगाया कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने अपने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने की मांग की। मेरा सोने जैसा बेटा छीन लिया, सरकार का बेड़ा गर्क हो जाए।
- मां ने बेटे के साथ हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए बताया कि घर से निकलने से पहले परमिंदर ने उनके पैर छुए थे। जाते समय उसने कहा था कि ‘मां, मेरी रोटी बनाकर रखना, मैं वापस आकर खाऊंगा।’ मां को उम्मीद थी कि बेटा काम खत्म कर घर लौट आएगा।
- मां ने आरोप लगाया कि उनका बेटा पहले भी अपनी जान को खतरा होने की आशंका जता चुका था। हालांकि, इस आशंका और हत्या के पीछे किसी कथित साजिश की पुलिस जांच से पुष्टि होना अभी बाकी है।

सिविल अस्पताल मानसा पहुंचे झोटा के पिता।
परमिंदर के पिता ने ये बातें कही…
- परमिंदर सिंह झोटा के पिता भीमसेन का दर्द और गुस्सा सामने आया है। समर्थकों और भारी भीड़ के बीच उन्होंने कहा कि न तो उनका बेटा कभी बिका था और न ही वह खुद झुकेंगे या बिकेंगे। पिता लोगों के बीच हाथ उठाकर अपनी बात कहते नजर आए।
- उन्होंने कहा कि यह बात सब लोगों को पता है कि यह बंदा अरबों-खरबों रुपए के आगे भी झुकने और बिकने वाला नहीं है। न मेरा बेटा बिका था और न ही मैं कभी बिकूंगा। अगर कोई सोचता है कि हमें डराकर या पैसे के दम पर दबा दिया जाएगा, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है।
- झोटा के पिता ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। वह बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात नशा तस्करों के खिलाफ लड़ता रहा, लेकिन सरकार और पुलिस प्रशासन ने उसे सुरक्षा देने के बजाय माफिया के भरोसे छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की शहादत बेकार नहीं जाएगी और नशे के खिलाफ शुरू हुआ संघर्ष अब जन आंदोलन बनेगा।

मामले की जानकारी देता हुआ प्रत्यक्षदर्शी।
चश्मदीद बोले- 10 मिनट तड़पते रहे झोटा
घटना के समय मौके पर मौजूद व्यक्ति ने दावा किया कि मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने झोटा पर सरेआम गोलियां चलाईं। गोली लगने के बाद झोटा करीब 10 मिनट तक दुकान के बाहर खून से लथपथ पड़े रहे।
इस दौरान न तो एंबुलेंस पहुंची और न ही कोई पुलिसकर्मी मौके पर आया। बाद में पास के एक दुकानदार ने झोटा को अपनी गाड़ी में बैठाकर सिविल अस्पताल मानसा पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई।

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पंजाब के मानसा में एंटी ड्रग टास्क फोर्स के संचालक परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार (13 अक्टूबर) सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। नशा बेचने का विरोध करने नशा विरोधी एक्टिविस्ट झोटा की मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी से बहस हुई। इसी दौरान अश्विनी ने उन्हें 3 गोलियां मार दीं। उनके 4 साथियों को भी गोली लगी है। जब झोटा को साथी ले जाने लगे तो मेडिकल स्टोर मालिक हाथ में पिस्टल लिए पीछे भी जाता दिखा। (पढ़ें पूरी खबर)
