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Ajmer JLN Hospital News | Baby Surgery Success After Swallowing Magnets


जवाहरलाल नेहरू(JLN) अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज, अजमेर के शिशु शल्य विभाग की टीम ने एक वर्षीय बच्चे की सफल सर्जरी कर उसकी जान बचाई। बच्चे ने खेलते-खेलते नौ चुंबकीय गोलियां (Magnetic Balls) निगल ली थीं। इन चुंबकीय गोलियों के कारण बच्चे की आंतों में एक-दू

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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. अनिल सामरिया, अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे, उप अधीक्षक डॉ. अमित यादव ने बताया- बच्चे द्वारा चुंबकीय गोलियां निगलने के बाद प्रारंभिक स्तर पर उसे स्थानीय स्तर पर चिकित्सकीय उपचार दिया गया। उस समय समस्या की गंभीरता का पता नहीं चल सका। कुछ समय बाद बच्चे का पेट धीरे-धीरे फूलने लगा तथा उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। गंभीर समस्या को देखते हुए परिजन बच्चे को जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के शिशु शल्य विभाग लेकर पहुंचे, जहां डॉ. गरिमा अरोड़ा ने बच्चे की विस्तृत जांच एवं आवश्यक परीक्षण करवाए।

जांच में सामने आया कि बच्चे की आंतों में फंसी नौ चुंबकीय गोलियों के कारण आंतों के विभिन्न हिस्से आपस में चिपक गए थे और लगातार चुंबकीय आकर्षण एवं दबाव के कारण 16 स्थानों पर आंतों में छेद हो चुके थे। इन छेदों के कारण आंतों में गंभीर क्षति, संक्रमण एवं अवरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। बच्चे का पेट लगातार फूल रहा था और उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी थी।

बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल जटिल शल्य चिकित्सा करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान आंतों में हुए 16 छेदों तथा चुंबकीय गोलियों के कारण हुई गंभीर क्षति का उपचार किया गया। ऑपरेशन में डॉ. गरिमा अरोड़ा, डॉ. दिनेश बारोलिया एवं शिशु शल्य विभाग की टीम के साथ एनेस्थीसिया विभाग की टीम, जिसमें डॉ. अरविंद खरे, डॉ. रतन यादव एवं उनकी टीम शामिल रही।

ऑपरेशन के बाद बच्चा पूर्णतः स्वस्थ

सफल ऑपरेशन एवं उपचार के बाद वर्तमान में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है तथा उसे चिकित्सालय से डिस्चार्ज कर दिया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में चुंबकीय वस्तुओं को निगलने के मामले अत्यंत गंभीर हो सकते हैं, क्योंकि एक से अधिक चुंबक आंतों के अलग-अलग हिस्सों को आपस में खींचकर उनमें दबाव एवं छेद पैदा कर सकते हैं।

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