राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम (87) उर्फ आशुमल को 20 दिन की पहली पैरोल मंजूर कर दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सोमवार को यह फैसला सुनाया।
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खंडपीठ ने पैरोल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा- पैरोल से इनकार करने के लिए राज्य सरकार की ओर से जताई गई आशंकाओं का ठोस आधार सामने नहीं आया है। आसाराम की ओर से एडवोकेट कालूराम भाटी और एडवोकेट यशपालसिंह राजपुरोहित ने पैरवी की।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया- जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट जोधपुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में आसाराम का 20 दिन की पैरोल आवेदन खारिज कर दिया गया था।

27 मई को सजा बरकरार रखने का सुनाया था फैसला
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने 27 मई को आसाराम की सजा पर फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के केस में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया था। इस फैसले के बाद ये पहली बार है, जब आसाराम को 20 दिन की पैराल मिली है।
पुलिस ने पैरोल में फरार होने की जताई थी संभावना
पुलिस ने आशाराम के पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार होने की संभावना जताई थी। इसके अलावा राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-1958 के नियम 14 (ए) का हवाला देते हुए कहा गया कि राजस्थान के बाहर उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है और गांधीनगर गुजरात की कोर्ट उसे दोषी ठहरा चुकी है।
राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि आसाराम का इलाज चल रहा है। मेडिकल अधिकारी ने उसे पैरोल के लिए फिट होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की संभावना भी जताई गई।
कोर्ट ने कहा- आसाराम 13 साल जेल में रह चुका
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा- आसाराम 13 साल, एक महीने और 24 दिन जेल में रह चुका है। इस दौरान उसे पहले अंतरिम जमानत मिली थी और उसके द्वारा जमानत का दुरुपयोग करने या समाज अथवा किसी गवाह को खतरा पहुंचाने की कोई घटना सामने नहीं आई। कोर्ट ने पैरोल से इनकार के लिए जताई गई आशंकाओं को निराधार बताया।
खंडपीठ ने कहा- राजस्थान में हुई सजा के संबंध में पैरोल के नियम लागू होंगे, जबकि किसी अन्य राज्य में दर्ज आपराधिक मामले की कार्रवाई वहां के कानून के अनुसार जारी रहेगी। कोर्ट ने 50 हजार रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और 25-25 हजार रुपए के दो सक्षम जमानतदारों की शर्त पर 20 दिन की पहली पैरोल मंजूर की।

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राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने 27 मई को आसाराम की सजा पर फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के केस में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। जस्टिस अरुण मोंगा व जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया था। (पूरी खबर पढ़ें)
