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Chatra aims to sow paddy in 67,545 hectares of land, farmers worried due to less rainfall



मानसून की कमजोर बारिश का असर जिले की खरीफ खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपनी की रफ्तार धीमी है। 8 अगस्त तक जिले में निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले महज 47.16 फीसदी खेतों में ही धनरोपनी हो सकी है। वहीं मक्का की बु

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मक्का का आच्छादन 94.36 फीसदी हो चुका है। जिला कृषि विभाग की फसल आच्छादन रिपोर्ट के अनुसार जिले में अब तक सभी खरीफ फसलों को मिलाकर 57.34 फीसदी आच्छादन हुआ है। विभाग ने इस खरीफ मौसम में जिले में कुल 67,545 हेक्टेयर भूमि में विभिन्न फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके विरुद्ध 8 अगस्त तक 38,729 हेक्टेयर में फसलों का आच्छादन हुआ है। धान के लिए 36,500 हेक्टेयर का लक्ष्य है, जबकि अब तक 17,213 हेक्टेयर में ही धनरोपनी हो पाई है। इसमें हाइब्रिड, अधिक उपजशील और उन्नत किस्म के धान शामिल हैं।

बारिश के आंकड़े भी किसानों की चिंता बढ़ाने वाले हैं। जून में जिले में सामान्य बारिश 167.1 मिमी के मुकाबले सिर्फ 9.5 मिमी बारिश हुई। जुलाई में सामान्य 308.2 मिमी के विरुद्ध 134.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं 8 अगस्त तक सामान्य 310.8 मिमी के मुकाबले सिर्फ 53.2 मिमी बारिश हुई है। लगातार कम बारिश का सबसे अधिक असर धान की रोपनी पर पड़ा है। मक्का की बुआई लक्ष्य के करीब : मक्का की खेती के मामले में जिले की स्थिति बेहतर है। विभाग ने 9,960 हेक्टेयर में मक्का की खेती का लक्ष्य रखा है।

इसके विरुद्ध 9,398 हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। यानी लक्ष्य का 94.36 फीसदी हासिल कर लिया गया है। वहीं दलहन फसलों का आच्छादन 65.72 फीसदी है। 17,600 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 11,566 हेक्टेयर में दलहन की खेती हुई है। मोटे अनाज का आच्छादन सबसे कम है। 1,825 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध महज 180 हेक्टेयर में खेती हुई है, जो 9.86 फीसदी है। तेलहन फसलों में 1,660 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 372 हेक्टेयर में आच्छादन हुआ है। इसका प्रतिशत 22.41 फीसदी है। ^जिले में इस वर्ष काफी कम बारिश हुई है। इसका सीधा असर धनरोपनी पर पड़ा है। अभी धनरोपनी का समय चल रहा है। यदि आने वाले दिनों में लगातार अच्छी बारिश होती है तो धनरोपनी की रफ्तार बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि बारिश होने पर किसान तेजी से खेतों में धान की रोपनी कर सकेंगे।^ -गौतम कुमार , जिला कृषि पदाधिकारी चतरा ।



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